Thursday, March 3, 2016

रहस्यमयी और चमत्कारिक काल भैरव मंदिर - जहां भगवान काल भैरव करते है मदिरा पान

हमारे भारत में अनेक ऐसे मंदिर है जिनके रहस्य आज तक अनसुलझे है।आज हम आपको बता रहे है महाकाल की नगरी उज्जैन में स्तिथ काल भैरव मंदिर के बारे में। इस मंदिर की सबसे बड़ी विशेषता यह है की यहाँ पर भगवान काल भैरव साक्षात रूप में मदिरा पान करते है। जैसा की हम जानते है काल भैरव के प्रत्येक मंदिर में भगवान भैरव को मदिरा प्रसाद के रूप में चढ़ाई जाती है। लेकिन उज्जैन स्तिथ काल भैरव मंदिर में जैसे ही शराब से भरे प्याले काल भैरव की मूर्ति के मुंह से लगाते है तो देखते ही देखते वो शराब के प्याले खाली हो जाते है।

छः हज़ार साल पुराना है मंदिर -

मध्य प्रदेश के उज्जैन शहर से करीब 8 कि.मी. दूर, क्षिप्रा नदी के तट पर कालभैरव मंदिर स्थित है। कालभैरव का यह मंदिर लगभग छह हजार साल पुराना माना जाता है। यह एक वाम मार्गी तांत्रिक मंदिर है। वाम मार्ग के मंदिरों में माँस, मदिरा, बलि, मुद्रा जैसे प्रसाद चढ़ाए जाते हैं। प्राचीन समय में यहाँ सिर्फ तांत्रिको को ही आने की अनुमति थी। वे ही यहाँ तांत्रिक क्रियाएँ करते थे। कालान्तर में ये मंदिर आम लोगों के लिए खोल दिया गया। कुछ सालो पहले तक यहाँ पर जानवरों की बलि भी चढ़ाई जाती थी। लेकिन अब यह प्रथा बंद कर दी गई है। अब भगवान भैरव को केवल मदिरा का भोग लगाया जाता है। काल भैरव को मदिरा पिलाने का सिलसिला सदियों से चला आ रहा है। यह कब, कैसे और क्यों शुरू हुआ, यह कोई नहीं जानता।

मंदिर में काल भैरव की मूर्ति के सामने झूलें में बटुक भैरव की मूर्ति भी विराजमान है। बाहरी दिवरों पर अन्य देवी-देवताओं की मूर्तियां भी स्थापित है। सभागृह के उत्तर की ओर एक पाताल भैरवी नाम की एक छोटी सी गुफा भी है।

कहते है की बहुत सालो पहले एक अंग्रेज अधिकारी ने इस बात की गहन तहकीकात करवाई थी की आखिर शराब जाती कहां है। इसके लिए उसने प्रतिमा के आसपास काफी गहराई तक खुदाई भी करवाई थी। लेकिन नतीजा कुछ भी नहीं निकला। उसके बाद वो अंग्रेज भी काल भैरव का भक्त बन गया।

स्कंद पुराण में है मंदिर से जुडी कहानी -
मंदिर में शराब चढ़ाने की गाथा भी बेहद दिलचस्प है। यहां के पुजारी बताते हैं कि स्कंद पुराण में इस जगह के धार्मिक महत्व का जिक्र है। इसके अनुसार, चारों वेदों के रचियता भगवान ब्रह्मा ने जब पांचवें वेद की रचना का फैसला किया, तो उन्हें इस काम से रोकने के लिए देवता भगवान शिव की शरण में गए। ब्रह्मा जी ने उनकी बात नहीं मानी। इस पर शिवजी ने क्रोधित होकर अपने तीसरे नेत्र से बालक बटुक भैरव को प्रकट किया। इस उग्र स्वभाव के बालक ने गुस्से में आकर ब्रह्मा जी का पांचवां मस्तक काट दिया। इससे लगे ब्रह्म हत्या के पाप को दूर करने के लिए वह अनेक स्थानों पर गए, लेकिन उन्हें मुक्ति नहीं मिली। तब भैरव ने भगवान शिव की आराधना की। शिव ने भैरव को बताया कि उज्जैन में क्षिप्रा नदी के तट पर ओखर श्मशान के पास तपस्या करने से उन्हें इस पाप से मुक्ति मिलेगी। तभी से यहां काल भैरव की पूजा हो रही है। कालांतर में यहां एक बड़ा मंदिर बन गया। मंदिर का जीर्णोद्धार परमार वंश के राजाओं ने करवाया था।

रात में भूख लगे तो फिट रहने के लिए क्या खाएं और क्या न खाएं

लाइफस्टाइल डेस्क:आधी रात का हो या फिर भरी दुपहरी। दिन में कुछ घंटे ऐसे होते हैं,जब कोई खास फूड खाने की तलब उठती है। कभी सोचा क्यो? असल में यह तलब शरीर में कुछ खास तत्वों की कमी के कारण लगती है। उनसे बचने के लिए यह जानें।

1-चॉकलेट

यदि आपका मन चॉकलेट खाने का कर रहा है तो समझ जाइए कि शरीर में मैग्नीशियम कम हो रहा है। इसे दूर करने के लिए चॉकलेट के बजाय नट्स खा लें। ये हेल्दी होने के साथ ही मैग्नीशियम की कमी पूरी करते हैं और वजन भी नहीं बढ़ाते।
2-सॉल्टी फूड

मिड-मार्निंग और लेट ईवनिंग में सॉल्टी फूड खाने का मन करता है। उस वक्त चिप्स,नमकीन और स्नैक्स याद आते हैं। यदि ऐसा लगातार हो तो इसका अर्थ है कि आप हद से ज़्यादा तनाव पाले बैठी हैं। ऐसे में ऑयली सॉल्टी स्नैक्स की जगह पर बेक्ड सॉल्टी आइटम खाएं,जैसे बेक्ड पोटैटो या पॉपकॉर्न।

3- मीठा

आपको यदि रोज खाना खाने के बाद मीठा खाना ज़रूरी लगता है तो इसका आशय क्रोमियम की कमी से है। इस मीठे की तलब से दूर रहने के लिए सेब का सहारा लें या फिर ड्राय फ्रूट्स और शहद को मिक्स करके डिश बना लें। इसे खाने से शरीर को क्रोमियम मिल जाएगा और आप ज़्यादा मीठा खाने से बचेंगी।
4-मीट

आप नॉन-वेजीटेरियन हैं और हर वक्त बस ऐसी डिश खाने की इच्छा होती है तो आपके शरीर में आयरन कम है। रोज नॉन-वेज खाना सेहत के लिए अच्छा नहीं। इसलिए जब भी इस तरह की तलब उठे तो नट्स,दालें और बीन्स से बने फूड आइटम्स खाना प्रेफर करें। सेहत बनी रहेगी।

5-ब्रेड और पास्ता

पास्ता,गार्लिक ब्रेड,सैंडविच ब्रेड जैसे फूड आइटम्स भी इसी कैटेगरी में आते हैं,जिन्हें खाने की तीव्र चाहत कभी-कभी उठती है। इसका मतलब है कि शरीर को कार्बोहाइड्रेट्स चाहिए। इस तरह के फूड आइटम्स हफ्ते में एक बार ही लें। इनके विकल्प के रूप में शकरकंद,स्वीट बीन्स और ओट्स लें। ये कार्बोहाइड्रेट और फाइबर से भरपूर फूड आयटम्स हैं।
6-स्पाइसी फूड

रात के समय कोशिश करें कि ज़्यादा स्पाइसी या ऑयली खाना न खाएं। इससे आपका पेट खराब हो सकता है और स्पाइस में जो कैमिकल्स होते है वो आपके मेटाबॉल्जिम पर असर कपते है। इसकी जगह आप हल्का और सादा खाना पसंद करें। जैसे दलिया,ओट्स,सलाद खा सकते हैं।

इसके अलावा आप रात में हेल्दी खाना खाएं,जो आपको फिट और पेट को सही रखने में मदद करेगा।

7-ब्लूबैरीज

रात में आप स्नैक्स और स्पाइसी फूड के बदले आप विटामिन और प्रोटीन खाना खाएं। जैसे रात में ब्लूबेरीज रात में खाना सही रहता है। क्योंकि इसमें एंटी-ऑक्सीडेंट होता है जो आपको पेट और मूड़ कोल सही रखता है।

ऑफिस वर्क से बढ़ सकता है कमर दर्द, इससे निजात पाने के ये हैं 8 उपाय

ऑफिस वर्क से बढ़ सकता है कमर दर्द, इससे निजात पाने के ये हैं 8 उपाय

लाइफस्टाइल डेस्क: हमारा शरीर बचपन में वैसे तो सही होता है, लेकिन जैसे-जैसे उम्र बढ़ती जाती है, दिक्कतें शुरू हो जाती हैं। अगर आप हेल्दी हैं तो आप दौड़ सकते हैं, कूद सकते हैं और एक्सरसाइज़ भी कर सकते है। लेकिन आज के समय में बहुत सारे लोग कमर दर्द से इस कदर परेशान रहते हैं, जिसके चलते वो मॉर्डन लाइफ का मजा नहीं ले पाते। दरअसल, लगातार कम्प्यूटर पर काम करना, टीवी के सामने बैठे रहना या फिर झुककर पढ़ने से कमर दर्द होने लगता है।
आज हम आपको कमर दर्द से निजात पाने के लिेए कुछ टिप्स दे रहे हैं, जिनका आप काम करते वक्त खास ध्यान रखें।

क्यों होता है पीठ दर्द

पीठ दर्द की समस्या रातों-रात पैदा नहीं होती। यह बहुत लंबे समय तक बरती गई असावधानी का नतीजा होता है। सोने की मुद्रा,वजन संबंधी मामलों या तनाव के स्तर से जुड़े मामलों में की गई जरा सी अनदेखी आपको इसका शिकार बना सकती है।

कैसे बचें

पीठ दर्द के लिए कई औषधियां उपलब्ध हैं परंतु लंबे आराम के लिए जीवनशैली में परिवर्तन आवश्यक है। सीधे बैठना,नियमित तौर पर चलना,वजन कम करना,संतुलित भोजन और एक्सरसाइज़ से इससे बचा जा सकता है। महिलाओं को होने वाले पीठ दर्द को किडनी,ब्लेडर तथा गाल ब्लेडर से संबधित समस्या मानकर इलाज करवाया जाता है। असल में ऐसा नहीं होता। यह पीठ की मांसपेशियों में गड़बड़ी के कारण होता है। इससे बचने का सबसे अच्छा तरीका है कि घर में काम के दौरान कोई भारी सामान अचानक न उठाएं। इसके साथ ही ऑफिस में काम करने वाले लोगों को यह ध्यान रखना चाहिए कि लगातार बैठे रहना अच्छा नहीं होता। काम के दौरान बीच-बीच में टहल लेना बेहतर होता है।1-पोश्चर सही रखें

कमर दर्द होने पर सबसे ज़रूरी है कि आपके बैठने का तरीका सही होना चाहिेए। आपके बैठने-उठने के गलत तरीके से कमर पर बुरा असर पड़ता है। जब भी आप बैठते, खड़े होते या सोते हैं, तो अपने पोश्चर का ध्यान रखें। पोश्चर हमारे हेल्थ पर असर डालता है। कई बार सोते वक्त पोश्चर सही न होने की वजह से कमर दर्द या बॉडी के किसी हिस्से में दर्द होने लगता है। इसलिए सबसे पहले पोश्चर को सही करें। इसके साथ ही, रिस्पेरेटरी सिस्टम और डाइजेस्टिव सिस्टम को सही रखना भी ज़रूरी है।2-सेंस (समझ) को बैलेंस करें

जितना कहना आसान है, उतना ही करना मुश्किल है। अपने सेंस को डेवलप करने में किसी को भी काफी टाइम लगता है। डेली लाइफ में ज़रूरी एक्सरसाइज़ को शामिल करें। इससे आपके दिमाग और बॉडी के बीच एक कनेक्शन बना रहेगा। इस कनेक्शन का बना रहना इसलिए जरूरी है, क्योंकि जब भी आपके दिमाग को मांसपेशियों के उपयोग की ज़रूरत हो, तो आपकी बॉडी तुरंत सिग्नल दे सके। सेंस को बैलेंस करने के लिए आपको रोज़ कुछ एक्टिविटीज की प्रैक्टिस करनी चाहिए, जैसे योगा और पाइलेट्स। 3-बैठने का तरीका सही हो

जब आप बैठते हैं तो आपका तरीका सही होना चाहिए। कई बार बैठने के गलत तरीके से भी कमर का दर्द होने लगता है। जब आप लंबे समय तक बैठते हैं, आपकी कोर (पेट और कमर के बीच की मांसपेशियां) इसके लिए सपोर्ट करती है। ये मांसपेशियां अधिक बार यूज़ करने पर इग्ज़ॉस्टिड हो जाती हैं और आपकी बॉडी थकने लगती है। इसलिए बैठते समय बॉडी का खास ध्यान रखें। आपके पैर और घुटने में 90 डिग्री एंगल हो और आपकी बैक कुर्सी के पीछे तक हो। इसके साथ यह भी ज़रूरी है कि आपकी डेस्क और चेयर के बीच दूरी होनी चाहिए। झुककर कभी काम न करें। ऐसा ज्यादा समय तक करने पर कमर में दर्द की शिकायत होगी ही।4-रोज़ एक्सरसाइज़ करें

जो लोग रोज़ एक्सरसाइज़ करते हैं, उन्हें कमर दर्द या गर्दन के दर्द की कम शिकायत होती है। जितना आप पैदल चलेंगे, उतना ही फिट और हेल्दी रहेंगे। इस फंडे को अपनाने से आपकी बॉडी फिट रहेगी। आप अपनी फिटनेस के हिसाब से स्पोर्ट्स या कोई भी एक्टिविटी करना शुरू कर दें। आप योगा, जॉगिंग, वॉक, वॉलीवॉल और मसल्स को डेवलप करने वाले दूसरी एक्सरसाइज़ कर सकते हैं। रोज़ एक्सरसाइज़ करने के लिए नियम बना लें। इसे अपनी रूटीन में शामिल करें। एक्सरसाइज़ करने से बॉडी को काफी फायदा होता है। रोज़ की एक्सरसाइज़ के लिए शुरुआत में ट्रेनर रख सकते हैं।5-कपड़ों और एसेसरीज पर ध्यान दें

इसमें कोई शक नहीं कि महिलाएं सुंदर दिखने के लिए कुछ भी पहन सकती हैं। अगर आपको खुद को अच्छे से कैरी कर रही हैं और आपको लगता है कि इस तरह के कपड़े और एसेसरीज आपकी बॉडी के लिए फिट हैं तो आप कैरी करें। लेकिन अगर नहीं, तो आपके कपड़े और एसेसरीज आपके लिए खतरनाक हो सकते हैं। शायद ही आपको कोई ऐसी महिला दिखेगी जो हाई हील न पहनती हो। चाहे हमारी स्पाइन पर एक्स्ट्रा लोड पड़ रहा हो, लेकिन पहननी हील ही है। हील के अलावा हैंडबैंग भी है। ये हमेशा एक हाथ या कंधे पर लटका रहता है। हील और हैंडबैग के बिना आज के टाइम में महिलाओं का बाहर निकलना थोड़ा मुश्किल है। हमें चाहे कितनी भी परेशानी हो, लेकिन हम बैग या हील के साथ कोई समझौता नहीं करना चाहते। दरअसल, यही असली रीज़न होता है कमर दर्द या गर्दन में दर्द होने का। हैंडबैग, हील और एसेसरीज, इनसे ही आपके पोश्चर का तरीका बदल जाता है और आपकी नसों, लिगामेंट्स और जोड़ों में दर्द होना शुरू हो जाता है। अगर आप नया बैग खरीदने की सोच रही हैं, तो कोशिश करें कि मीडियम साइज़ का लें। इसके अलावा, अगर आप कोई एसेसरीज पहन रही हैं तो ध्यान रहे है कि इससे आपको कोई परेशानी न हो।6-स्ट्रेचिंग रोज़ करें

बॉडी को लचीला बनाने के लिए एक्सरसाइज़ करना ज़रूरी है। इस तरह से खुद को फिट रखने और मांसपेशियों को मजबूत बनाने के लिए ये ज़रूरी है। जिन लोगों को गर्दन और कमर का दर्द होता है, उन्हें स्ट्रेचिंग करने से काफी फायदा होता है। दिन में थोड़ी-सी स्ट्रेचिंग करने से बॉडी और मसल्स रिलेक्स रहती है। इसके लिए आप सीधे खड़े या बैठकर स्ट्रेच करें और एक बार में एक ही मसल्स को स्ट्रेच करें। स्ट्रेचिंग करते वक्स थोड़ी सावधानी बरतें।7-खुद को स्ट्रेस से दूर रखें

शरीर में होने वाली दिक्कतें दरअसल स्ट्रेस से ज़्यादा बढती हैं। स्ट्रेस बढ़ने से आपका इमोशनल लेवल बढ़ता है। हम अपने इमोशन और फीलिंग को कंट्रोल नहीं कर सकते है, जिससे उदासी, गुस्सा आना और नर्वस होना जैसी दिक्कतें होने लगती हैं। जब आपको ज़्यादा स्ट्रेस होता है तो आपके दिमाग और बॉडी में हलचल-सी मच जाती है, क्योंकि आपकी मांसपेशियां तनाव से भर जाती हैं और ब्लड प्रेशर बढ़ जाता है। जब कभी भी आपको इस तरह की दिक्क्त हो, आप एक गहरी सांस लें और खुद को रिलेक्स करने की कोशिश करें।

अगर आपका काम ज़्यादा देर तक बैठे रहने का है तो कमर दर्द और गर्दन के दर्द के लिए तैयार हो जाइए। हमने आपको कुछ टिप्स दी है, शायद आपको इनसे कुछ फायदा हो। ऑफिस में लगातार बैठे रह कर काम करने से आपको इस तरह की दिक्कत हो सकती है, इसलिए खुद का ध्यान रखें और फिट रहें

कहीं श्मशान तो कहीं पिंजरा में रहते हैं लोग,....

लाइफस्टाइल डेस्क:आपने कई बार लोगों को ये कहते सुना होगा कि वो एरिया बहुत बेकार है। झुग्गी-बस्ती वाला एरिया है। बहुत ही गंदा है और वहां सिर्फ गरीब लोग रहते हैं। ये बात सच है। आज हर शहर और मेट्रो सिटीज में स्लम्स की भरमार होती जा रही है, लेकिन ऐसा नहीं है कि ऐसी जगहें भारत में ही हैं। पूरी दुनिया में ऐसी जगहें काफी सारी मिल जाएंगी, जिन्हें स्लम कहते हैं और जहां गरीब लोग बसते हैं। आज हम आपको दुनिया के स्लम एरिया के बारे में बता रहे हैं।

1-वैंकूवर, ब्रिटिश कोलंबिया

वैंकूवर कोलंबिया का स्लम एरिया है। यहां पर आपको ड्रग एडिक्ट, एचआईवी पॉजिटिव और दूसरी संक्रामक बीमारियों से जूझते लोग मिल जाएंगे। यहां पर आपको हेपेटाइटिस के हजारों केस मिलेंगे। यहां एक ऐसी मार्केट है, जहां आपको चोरी का सामान बहुत सस्ते में मिल जाएगा। इस एरिया में चोरी, वेश्यावृत्ति, मर्डर, रेप और न जाने कितने क्राइम दिनदहाड़े होते हैं। यहां पागलों की भी अच्छी-खासी संख्या है। यहां के घरों देखकर आप समझ जाएंगे कि न जाने कितने सालों से सफाई नहीं हुई है। यहां पर कितने लोग ऐसे हैं जिनकी लाइफ इसी गंदगी में खत्म हो गई। यह बस्ती गुमनाम जिंदगी जीने वालों का बसेरा है। 2008 में इस बस्ती पर एक फिल्म ‘पेन एंड वस्टिंग्स’ बनी थी।
2-कनाडा रियल, मैड्रिड

यह यूरोप का सबसे बड़ा स्लम एरिया है जो 16 किलोमीटर दूर तक फैला हुआ है। इस स्लम में 30,000 से भी ज़्यादा लोग रहते हैं। इस एरिया के लोगों के पास आपको वो सामान मिल जाएंगे जिन्हें अमीर लोग फेंक देते हैं या बेकार होने पर बेच देते हैं। इस जगह पर लोगों ने पुराने और टूटे-फूटे सामानों से घर बनाया है। यहां पर भी आपको ड्रग लेने वाले लोगों की भरमार मिलेगी। यहां की सड़क को 'शूटिंग गैलरी' कहते हैं, क्योंकि इन सड़को पर सब कुछ गैरकानूनी होता है। इस बस्ती की दशा सही करने के लिए बहुत से सोशल वर्कर मदद करने को आते हैं, लेकिन सरकार यहां पर ध्यान नहीं देती। 

3-कोलोनियास इन टेक्सास

टेक्सास और साउथ-वेस्ट अमेरिका में आपको काफी स्लम एरिया मिल जाएंगे। ये एरिया खासकर स्पेनी लोगों के लिए हैं, लेकिन इन लोगों की लाइफ मेक्सिको से बेहतर होती है। इस कॉलोनी में पैदा हुए लोगों को बाहर की दुनिया के बारे में कम ही पता होता है। यहां पर दूसरे एरिया की तरह लाइट, पानी और दूसरी सुविधाएं उपलब्ध नहीं हैं। इस बस्ती को सुरक्षित रखने के लिए काफी सारे कानून बनाए गए हैं, लेकिन फिर भी इस बस्ती से गरीबी दूर करने में सरकार को काफी मशक्कत करनी पड़ रही है।

4- महवा असर, यमन

स्लम एरिया के मामले में यमन भी पीछे नहीं है। यमन में इस जगह को महवा असर के नाम से जाना जाता है। यहां पर आपको दुनिया के सबसे गरीब और खतरनाक लोग मिलेंगे। यमन में अफ्रीकी लोगों के साथ गंदा व्यवहार किया जाता है। यहां पर 17,000 हजार लोगों के घर हैं। यहां के लोगों को सरकार की तरफ से नौकरी, वोट देने का अधिकार और किसी भी प्रकार के कानूनी सुविधा नहीं दी गई है।

5-द केज स्लम्स ऑफ हांगकांग, चाइना

दुनिया में गरीबी एक सजा की तरह है, लेकिन आपको यह जानकर हैरानी होगी कि चाइना में हांगकांग शहर के गरीब लोग पिंजरे में रहते हैं, जबकि चाइना दुनिया के समृद्ध देशों में से एक है। इन पिंजरों में 20000 हजार लोग रहते हैं। इस एरिया में 10 से भी ज़्यादा पिंजरे हैं और बहुत से लोग यहां पर काफी समय से रह रहे हैं। ये पिंजरे ही उनके घर हैं। जैसे ही आप पिंजरेनुमा घरों के आगे निकलेंगे, आपको ताबूत वाले घर मिलेंगे। यहां इतनी कम जगह होती है कि आप सिर्फ किसी तरह पांव मोड़ कर सो सकते हैं।
6-सिटी ऑफ द डेड, काहिरा

आज के इस मॉडर्न टाइम में आपको बिल्कुल भी यकीन नहीं होगा कि आज भी दुनिया में इतनी गरीबी हैं। काहिरा के स्लम एरिया को सिटी ऑफ द डेड कहा जाता है। यह बस्ती 700 साल पुरानी है। इस एरिया में जनसंख्या ज़्यादा हो गयी है। इस वजह से लोग अपने पूर्वजों की कब्र के साथ रहते हैं। इस एरिया में लोगों ने रहने के लिए खुद से ही घर, किचन और गार्डन भी बनाए हुए हैं। यहां पर बिजली, पानी और अन्य सुविधाओं की कमी है।

7-द टेंट सिटीज ऑफ सिएटल, वाशिंगटन

कभी-कभी जहां हम घूमने जाते हैं, वहां पर टेंट हाउस बना कर रहते हैं, लेकिन आपको पता है कि कुछ लोग गरीबी के कारण टेंट हाउस में रहते हैं। वाशिंगटन के एक एरिया में 275 लोग ऐसे ही टेंटों में जिदगी बसर करते हैं। रात में सोने के लिए टेंट लगाते हैं और सुबह में हटा देते हैं। 1970 में गरीब लोगों के लिए सस्ते और छोटे अपार्टमेंट्स बनाए गए। ये एक रूम के घर थे। लेकिन बहुत लोगों को ये घर भी नहीं उपलब्ध हो पाए। इस वजह से वे लोग टेंट में ही रह रहे हैं। इस बस्ती में भी बिजली, पानी और बाकी सुविधाओं की कमी है। 

8-पेरिस, फ्रांस

जिस देश को प्यार और रोमांस की जगह माना जाता है, वहां पर भी लोग गरीब हैं, यह सुनकर अजीब लगता है। डार्क सीक्रेट से 10 मिनट की दूरी पर आपको एक ऐसा ही एरिया देखने को मिलेगा। इस एरिया के प्रवेश द्वार पर पुलिस ने 'नो-गो जोन' लिखा हुआ है। शुरुआती समय में मिडल ईस्ट और रोम के लोग आए थे, जो यहीं पर बस गए। यहां के लोगों को और उनके बच्चे को फ्रांस की नागरिकता नहीं हासिल है। यह पेरिस का यह सबसे गंदा स्लम एरिया है। यहां के लोगों के पास न तो घर है और न ही नौकरी। इस वजह से यहां पर क्राइम और वेश्यावृत्ति ज़्यादा होती है।

हनुमान जी की पूंछ में करती थी देवी पार्वती निवास

भोले शंकर ने माता पार्वती का मनोरथ पूर्ण करने के लिए कुबेर से कहलवाकर स्वर्ण का भव्य महल बनवाया। रावण की दृष्टि जब इस महल पर पड़ी तो उसने सोचा इतना सुंदर महल तो त्रिलोकी में किसी के पास नहीं है। अत: यह महल तो मेरा होना चाहिए। वह ब्राह्मण का रूप धार कर अपने इष्ट भोले शंकर के पास गया और भिक्षा में उनसे स्वर्ण महल की मांग करने लगा। भोले शंकर जान गए की उनका प्रिय भक्त रावण ब्राह्मण का रूप धार कर उनसे महल की मांग कर रहा है। द्वार पर आए ब्राह्मण को खाली हाथ लौटाना उन्हें धर्म विरूद्ध लगा क्योंकि शास्त्रों में वर्णित है द्वार पर आए हुए याचक को कभी भी खाली हाथ या भूखे नहीं जाने देना चाहिए। भूलकर भी अतिथि का अपमान मत करो। हमेशा दान के लिए हाथ बढाओ। ऐसा करने से सुख, समृद्धि और प्रभु कृपा स्वयं तुम्हारे घर आएंगी परंतु याद रहे दान के बदले मे कुछ पाने की इच्छा न रखें। निर्दोष हृदय से किया गया गुप्त दान महाफल प्रदान करता है। भोले शंकर ने खुशी-खुशी महल रावण को दान में दे दिया। जब पार्वती जी को ज्ञात हुआ की उनका प्रिय महल भोले शंकर ने रावण को दान में दे दिया है तो वह खिन्न हो गई। भोले शंकर ने उनको मनाने का बहुत प्रयत्न किया मगर वह न मानीं। जब सभी प्रयास विफल हो गए तो उन्होंने पार्वती जी को वायदा किया की त्रेतायुग में जब राम अवतार होगा तो मैं वानर का रूप धर कर हनुमान का अवतार लूंगा। तब आप मेरी पूंछ बन जाएं। राक्षसों का संहार करने के लिए प्रभु राम की माया से रावण माता सीता का हरण कर ले जाएगा तो मैं माता सीता की खोज खबर लेने तुम्हारे स्वर्ण महल में आऊंगा जोकि भविष्य में सोने की लंका के नाम से विख्यात होगी। उस समय तुम मेरी पूंछ के रूप में लंका को आग लगा देना और रावण को दण्डित करना। पार्वती जी मान गई। इस तरह भोले शंकर बने हनुमान और मां पार्वती बनी उनकी पूंछ। ये प्रसंग भी शिव के श्री हनुमान अवतार और लंकादहन का एक कारण माना जाता है।

बिछिया और महिलाओं के गर्भाशय के बीच है खास संबंध

भारत एक बहु-सांस्कृतिक देश है, जहां विभिन्न धर्मों के अनगिनत रिवाज़ हैं, परंपराएं हैं। खासतौर से हिन्दू धर्म में ही देखिए, पूजा करने से लेकर रोज़ाना किस-किस तरह के कार्य किए जाएं, जिससे कि लाभ मिले इसका वर्णन शास्त्रों में मौजूद है। हमारे खाने से लेकर हम क्या पहनते हैं, इसका भी हमारे मन-मस्तिष्क एवं स्वास्थ्य पर गहरा प्रभाव होता है, कुछ ऐसा कहना है हिन्दू शास्त्रों का।
अब हिन्दू महिलाओं को ही देख लीजिए, जो सोलह श्रृंगार करने के लिए प्रसिद्ध हैं। माथे की बिंदी से लेकर, पांव में पहनी जाने वाली बिछिया तक, हर एक वस्तु का अपना ही महत्व है। परंपराओं की दृष्टि से तो इनके महत्व रोचक हैं ही, लेकिन इसके अलावा भी यह प्रत्येक आभूषण एवं श्रृंगार सामग्री कुछ ना कुछ कहती जरूर है।
कुछ इन्हीं वस्तुओं की जानकारी प्राप्त करने हेतु, मुझे एक रोचक तथ्य प्राप्त हुआ। जिसमें यह लिखा गया था कि महिलाओं द्वारा पांव में पहनी जाने वाली बिछिया का उनके गर्भाशय से गहरा संबंध होता है।
हिन्दू और मुसलमान, दोनों में ही शादी के बाद औरतों द्वारा बिछिया पहनने का रिवाज़ है। कई लोग इसे सिर्फ शादी का प्रतीक चिन्ह और परंपरा मानते हैं लेकिन इसके पीछे एक वैज्ञानिक कारण है जिसके बारे में कम ही लोगों को पता है, वह है इस बिछिया का गर्भाशय से जुड़ा संबंध।
शास्त्रों में यह लिखा है कि दोनों पैरों में चांदी की बिछिया पहनने से महिलाओं को आने वाली मासिक चक्र नियमित हो जाती है। इससे महिलाओं को गर्भ धारण में आसानी होती है। चांदी विद्युत की अच्छी संवाहक मानी जाती है। धरती से प्राप्त होने वाली ध्रुवीय उर्जा को यह अपने अंदर खींच पूरे शरीर तक पहुंचाती है, जिससे महिलाएं तरोताज़ा महसूस करती हैं।
इसी तरह साइंस ने बताया है कि पैरों के अंगूठे की तरफ से दूसरी अंगुली में एक विशेष नस होती है जो गर्भाशय से जुड़ी होती है। यह गर्भाशय को नियंत्रित करती है और रक्तचाप को संतुलित कर इसे स्वस्थ रखती है। बिछिया के दबाव से रक्तचाप नियमित और नियंत्रित रहती है और गर्भाशय तक सही मात्रा में पहुंचती रहती है।
यह बिछिया अपने प्रभाव से धीरे-धीरे महिलाओं के तनाव को कम करती है, जिससे उनका मासिक-चक्र नियमित हो जाता है। इसका दूसरा फायदा यह है कि बिछिया महिलाओं के प्रजनन अंग को भी स्वस्थ रखने में भी मदद करती है। बिछिया महिलाओं के गर्भाधान में भी सहायक होती है।

ये है दुनिया का एकमात्र मंदिर, जहां स्त्रीरूप में हैं हनुमान

दुनियाभर में भगवान हनुमान के कई अनोखे मंदिर हैं, लेकिन भारत में एक ऐसा भी मंदिर है, जो भगवान हनुमान के बाकी सभी मंदिरों से अलग है। यह मंदिर सबसे अलग और खास इसलिए है क्योंकि इस मंदिर में भगवान हनुमान पुरुष नहीं बल्कि स्त्री के रूप में पूजे जाते हैं।हनुमान जी का यह मंदिर छत्तीसगढ़ के रतनपुर गांव में है। यह संसार का इकलौता मंदिर है, जहां हनुमान जी की नारी प्रतिमा की पूजा होती है। माना जाता है कि हनुमान जी की यह प्रतिमा दस हजार साल पुरानी है। जो भी भक्त श्रद्धा भाव से इस हनुमान प्रतिमा के दर्शन करते हैं, उनकी सभी मनोकामना पूरी होती है।मूर्ति की स्थापना से जुड़ी कथाइस क्षेत्र मे भगवान हनुमान के नारी रूप में होने के पीछे एक कथा प्रचलित है। कथा के अनुसार, प्राचीन काल में रतनपुर के एक राजा थे पृथ्वी देवजू। राजा हनुमान जी के भक्त थे। राजा को एक बार कुष्ट रोग हो गया। इससे राजा जीवन से निराश हो चुके थे। एक रात हनुमान जी राजा के सपने में आए और मंदिर बनवाने के लिए कहा। मंदिर निर्माण का काम जब पूरा हो गया तब हनुमान जी फिर से राज के सपने में आए और अपनी प्रतिमा को महामाया कुण्ड से निकालकर मंदिर में स्थापित करने का आदेश दिया। जब राजा ने महामाया कुंड में भगवान हनुमान की प्रतिमा देखी तो वह नारी रूप में थी। राजा ने भगवान के आदेश के अनुसार भगवान हनुमान की उसी नारी रूपी प्रतिमा की स्थापना कर दी।ऐसी है यहां की मूर्तिहनुमान जी की यह प्रतिमा दक्षिणमुखी है। इनके बायें कंधे पर श्री राम और दायें पर लक्ष्मण जी विराजमान हैं। हनुमान जी के पैरों के नीचे दो राक्षस हैं। मान्यता है कि हनुमान की प्रतिमा को स्थापित करने के बाद राजा ने कुष्ट रोग से मुक्ति एवं लोगों की मुराद पूरी करने की प्रार्थना की थी। हनुमान जी की कृपा से राजा रोग मुक्त हो गया और राजा की दूसरी इच्छा को पूरी करने के लिए हनुमान जी सालों से लोगों की मनोकामना पूरी करते आ रहे हैं।कैसे पहुंचेरतनपुर से लगभग 25 कि.मी, की दूरी पर बिलासपुर है। बिलासपुर के लिए देश के लगभग सभी बड़े शहरों से रेल गाड़ियां और बसें मिलती हैं।मंदिर के आस-पास घूमने के स्थानश्री काल भैरवी मंदिर: यहां पर काल भैरव की करीब 9 फीट ऊँची भव्य प्रतिमा है। कौमारी शक्ति पीठ होने के कारण कालांतर में तंत्र साधना का केन्द्र था। बाबा ज्ञानगिरी ने इस मंदिर का निर्माण कराया था।श्री महालक्ष्मी देवी मंदिर: कोटा मुख्य मार्ग पर इकबीरा पहाड़ी पर श्री महालक्ष्मी देवी का ऐतिहासिक मंदिर है। इसका स्थानीय नाम लखनीदेवी मंदिर भी है।

बहुत रहस्यमय है देवी के सरस्वती के हाथ की वीणा

1. हिन्दू धर्म

हिन्दू धर्म
हिन्दू धर्म में सभी देवी-देवताओं क्लो विशिष्ट स्थानों से नवाजा गया है, इतना ही नहीं ये सभी देवी-देवताएं मनुष्य़ जीवन को अपनी-अपनी तरह से प्रभावित भी करते हैं और उनके लिए उपयोगी भी होते हैं।

2. देवी सरस्वती

देवी सरस्वती
देवी सरस्वती की बात करें तो उन्हें ज्ञान, पवित्रता और बुद्धि की देवी कहा जाता है। तस्वीरों और पौराणिक कहानियों की बात करें तो उनमें कमल के फूल पर विराजित माता सरस्वती के हाथ में वीणा दिखाई जाती है।

3. सरस्वती देवी की वीणा

 सरस्वती देवी की वीणा
कभी आपने सोचा हैं सरस्वती देवी की वीणा से क्या संबंध है? वे ज्ञान की देवी हैं तो इसमें वीणा की क्या भूमिका है? हां, उन्हें संगीत की देवी भी कहा जाता है लेकिन अन्य किसी भी वाद्य यंत्र को छोड़कर उन्होंने वीणा ही क्यों थामी?

4. सवाल

सवाल
वैसे ये सवाल थोड़े सामान्य है लेकिन इस बात में भी कोई संदेह नहीं है कि अब तक भले ही आपने इस विषय पर ना सोचा हो, लेकिन अब जब ये बात सामने आई है तो अब आपके मस्तिष्क में इस सावल के जवाब की कुलबुलाहट हो रही होगी।

5. मोक्ष

मोक्ष
दरअसल समस्त वाद्य यंत्रों में वीणा बहुत महत्वपूर्ण मानी जाती है, जिसकी धुनों का संबंध सीधे ईश्वर से स्थापित होता है। ऋषि यज्ञवल्क्य ने कहा भी था “वे मनुष्य जिसे वीणा में महारथ हासिल है, उसे बिना प्रयास के मोक्ष की प्राप्ति होती है”। देवी सरस्वती के हाथ मंं वीणा बहुत कुछ दर्शाती हैं।

6. अज्ञान के अंधकार

अज्ञान के अंधकार
देवी सरस्वती के हाथ में जो वीणा है उसे “ज्ञान वीणा” कहा जाता है। यह ज्ञान, अध्यात्म, धर्म और अन्य सभी भौतिक वस्तुओं से संबंधित है। जब वीणा को बजाया जाता है, उसमें से निकलने वाली धुन चारों ओर फैले अज्ञान के अंधकार का नाश करती हैं।

7. निपुणता

निपुणता
सरस्वती देवी, वीणा के ऊपरी भाग को अपने बाएं हाथ से निचले भाग को अपने दाएं हाथ से थामे नजर आती हैं। यह ज्ञान के हर क्षेत्र पर निपुणता के साथ उनके नियंत्रण को दर्शाता है।

8. न्य देवी-देवता

न्य देवी-देवता
वीणा के भीतर अन्य देवी-देवता भी विराजते हैं। ऐसा माना जाता है कि वीणा की गर्दन के भाग में महादेव, इसकी तार में पार्वती, पुल पर लक्ष्मी, सिरे पर विष्णु और अन्य सभी स्थानों पर सरस्वती का वास होता है। वीणा को समस्त सुखों का स्रोत भी माना जाता है।

9. भारतीय संगीत

भारतीय संगीत
वीणा, भारतीय संगीत की हर व्यवस्था को प्रदर्शित करती है। तार वाले वाद्य यंत्रों को सामान्य तौर पर वीणा का ही नाम दे दिया जाता है।

10. वीणा की धुन

वीणा की धुन
वीणा की धुन रचना के मौलिकता को प्रदर्शित करती है। ये ब्रह्मांड में प्राण भरने का कार्य करती है। वीणा की धुन, उसकी तारें जीवन को दर्शाती हैं। इसके स्वर स्त्री स्वर से मेल खाते हैं।

11. वीणा की कंपन

वीणा की कंपन
वीणा की कंपन दैवीय ज्ञान की ओर इशारा करती हैं। वीणा के बजने पर ये ज्ञान पानी की तरह बहने लगता है।

12. ज्ञान का प्रसार

ज्ञान का प्रसार
वीणा दर्शाती हैं कि ज्ञान का प्रसार हमेशा दक्षता और कलात्मकता से पकिया जाना चाहिए। वीणा की तारें, इन्द्रीयों का प्रतिनिधित्व करती हैं। तारों पर नियंत्रण अर्थात अपनी इन्द्रियों को अपने नियंत्रण में रखना।

13. कच्छपी

कच्छपी
वीणा का दैविक नाम “कच्छपी” अर्थात मादा कच्छप है। यह दर्शाता है कि जिस तरह निष्क्रियता के काल में कच्छप अपनी सभी इन्द्रियों को हटा लेता है, कुछ इसी तरह मनुष्य को भी अपनी इन्द्रियों और इच्छाओं को नियंत्रित कर लेना चाहिए।

14. मधुर स्वर

मधुर स्वर
ऐसा करने के बाद ही वीणा के मधुर स्वर को समझा जा सकता है औरा इसका आध्यात्मिक आनंद प्राप्त किया जा सकता है। यही वजह है कि कुछ कलाकार वीणा के ऊपरी भाग को कच्छप की तरह दर्शाते हैं।

15. देवी सरस्वती

 देवी सरस्वती
जिस तरह मादा कच्छपी अंडों में से निकले बच्चों को सुरक्षित स्थान पर रखने के बाद उनपर ध्यान देते हुए अपनी जिम्मेदारियों को पूरा करने निकल जाती है, उसी तरह देवी सरस्वती भी अपने शिष्यों में ज्ञान का प्रकाश करने के बाद उनपर ध्यान भी देती हैं और उनके प्रति अपनी सभी जिम्मेदारियां भी उठाती हैं।

मंदिर-मठ आदि अक्सर पहाड़ों पर ही क्यों मौज़ूद होते हैं

1. पर्वतीय क्षेत्र

पर्वतीय क्षेत्र
जब भी हमें छुट्टियों का समय मिलता है तो हम निकल जाते हैं कहीं घूमने-फिरने। यदि आप भारतीय जमीन पर रहते हैं तो अधिकतम लोग छुट्टियां मिलते ही किसी पर्वतीय क्षेत्र में जाना पसंद करते हैं।

2. हरा-भरा माहौल

हरा-भरा माहौल
जहां आसपास हरियाली हो, सुंदर पहाड़ हो और आसपास ऐसी जगहें बनी हों जहां रुक कर प्रकृति का आनंद उठाया जाए। और जब भारत जैसे देश में हम पर्वतीय क्षेत्र की बात करते हैं हिमाचल प्रदेश जैसा अच्छा स्थान नहीं हो सकता। यह वह स्थान है जहां पहुंचने पर शायद हर किसी के मुंह से एक बार ‘जन्नत’ शब्द तो जरूर निकलता होगा।

3. मौका पाते ही जाते हैं हम

मौका पाते ही जाते हैं हम
स्कूल, कॉलेज या ऑफिस से यदि 2-3 दिन की राहत भी मिल जाए तो सुंदर पहाड़ियों पर समय काटने के लिए काफी होती हैं। चलिए आप ही बताएं यदि आपको यह मौका मिले तो आप हिमाचल जैसे पर्वतीय क्षेत्र में किस तरह से छुट्टियां मनाते हैं?

4. आप क्या करते हैं?

आप क्या करते हैं?
किसी प्रसिद्ध जगह पर जाकर, पर्वतों से संबंधित कुछ रोचक एक्टीविटीज करके या फिर जैसे कि कुछ लोग हिमाचल के आसपास धार्मिक स्थानों के दर्शन करते हैं वैसे? खैर आप हिमाचल में किसी धार्मिक स्थल के मकसद से जाएं या ना जाएं लेकिन फिर भी आपको रास्ते में कई धार्मिक स्थान मिल जाएंगे।

5. धार्मिक स्थल

धार्मिक स्थल
कुछ तो ऐतिहासिक होंगे, लेकिन कुछ ऐतिहासिक ना होकर भी लोगों की मान्यता एवं श्रद्धा के अनुसार बनाए गए हैं। रास्ते से गुजरते हुए शायद आपको हर 2 किलोमीटर के अंतर पर कोई ना कोई धार्मिक स्थल, जैसे कि छोटे-छोटे मंदिर, मान्यता पर आधारित धार्मिक पीठ, इत्यादि।

6. यहीं क्यों!

यहीं क्यों!
लेकिन क्या कभी आपने सोचा है कि हिमालय जैसे इलाके में ही यह मंदिर-पीठ इत्यादि क्यों बनाए जाते हैं? भारी मात्रा में धार्मिक स्थल इन्हीं क्षेत्रों में क्यों पाए जाते हैं? शायद आपको यह बात अजीब लग रही हो लेकिन यह सच है कि भारत में यदि किसी जगह अधिकतम धार्मिक स्थल हैं तो वह हिमालय में ही हैं।

7. एक सवाल

एक सवाल
परंतु ऐसा क्यों! किसी भी अन्य राज्य की तुलना में पर्वतीय क्षेत्र में ही सबसे अधिक मंदिर-पीठ होने का क्या महत्व है? प्रसिद्ध कवि रविंद्र नाथ टैगोर ने अपनी एक पुस्तक ‘साधना- दि रियलायज़ेशन ऑफ लाइफ’ में इसी मुद्दे को उठाया है।

8. साधना के लिए सर्वश्रेष्ठ स्थान

साधना के लिए सर्वश्रेष्ठ स्थान
उन्होंने बताया कि भारत में जब-जब साधना एवं भक्ति के लिए जगह की खोज की जाती है, तो किसी शांत, हरियाली से भरे माहौल को ही चुना जाता है। एक ऐसे स्थान को चुनने पर तवज्जो दी जाती है जहां आसपास का शांत पर्यावरण मन एवं दिमाग को शांति पहुंचाए।

9. हर किसी के लिए सही

हर किसी के लिए सही
लेकिन टैगोर ने यह भी बताया कि यह बात केवल भारतीय सीमा तक ही लागू नहीं होती। उन्होंने बताया कि क्रिश्चियनिटी में भी गिरिजाघर एवं मोनास्ट्री के लिए ऐसी ही हरी-भरी जगहों का चयन किया जाता है।

10. सुखमय स्थान

सुखमय स्थान
यह जगहें आत्मा को सुख प्रदान करती है, प्रकृति का यह रूप हमारी आत्मा को परमात्मा से मिलाने में सहायक सिद्ध होता है। शायद इसीलिए प्राचील काल से अब तक जब-जब ऋषि-मुनियों के मन में तपस्या का ख्याल आया है उन्होंने हिमालय की सुंदर वादियों की ओर ही रुख किया है।

11. हर किसी के लिए परफेक्ट

हर किसी के लिए परफेक्ट
पर आप इस गहतफहमी में ना रहिए कि केवल ऋषि-मुनि ही ऐसी वादियों पर जाकर परमात्मा से मिलने वाले सुख को प्राप्त करते हैं। स्वयं हम भी जब इन सुंदर वादियों में प्रवेश करते हैं तो अपने दिमाग को शांत पाते हैं। हमारी आंखें एक अजब-सी ठंडक को महसूस करती हैं और यही ठंडक हमारी आत्मा को शांत करती है।

स्वस्थ रहना है तो इन 20 बातों को अनदेखा न करें

1. आजकल बढ़ रहे चर्म रोगों और पेट के रोगों का सबसे बड़ा कारण दूधयुक्त चाय और इसके साथ लिया जाने वाला नमकीन है. 
2. कसी हुई टाई बाँधने से आँखों की रोशनी पर नकारात्मक प्रभाव होता है 
3. अधिक झुक कर पढने से फेफड़े,रीढ़,और आँख की रौशनी पर बुरा असर होता है
4. अत्यधिक फ्रीज किये हुए ठन्डे पदार्थों के सेवन से बड़ी आंत सिकुड़ जाती है.
5. भोजन के पश्चात स्नान स्नान करने से पाचन शक्ति मंद हो जाती है इसी प्रकार भोजन के तुरंत बाद मैथुन, बहुत ज्यादा परिश्रम करना एवं सो जाना पाचनशक्ति को नष्ट करता है.
6. पेट बाहर निकलने का सबसे बड़ा कारण खड़े होकर या कुर्सी मेज पर बैठ कर खाना और तुरंत बाद पानी पीना है. भोजन सदैव जमीन पर बैठ कर करें. ऐसा करने से आवश्यकता से अधिक खा नहीं पाएंगे. भोजन करने के बाद पानी पीना कई गंभीर रोगों को आमंत्रण देना है.
7. भोजन के प्रारम्भ में मधुर-रस (मीठा), मध्य में अम्ल, लवण रस (खट्टा, नमकीन) तथा अन्त में कटु, तिक्त, कषाय (तीखा, चटपटा, कसेला) रस के पदार्थों का सेवन करना चाहिए
8. भोजन के बाद हाथ धोकर गीले हाथ आँखों पर लगायें. यह आँखों को गर्मी से बचाएगा.
9. नहाने के कुछ पहले एक गिलास सादा पानी पियें. यह हाई ब्लड प्रेशर की समस्या से बहुत हद तक दूर रखेगा.
10. नहाने की शुरुवात सर से करें. बाल न धोने हो तो मुह पहले धोये. पैरों पर पहले पानी डालने से गर्मी का प्रवाह ऊपर की ओर होता है और आँख मस्तिष्क आदि संवेदन शील अंगो को क्षति होती है.
11. नहाने के पहले सोने से पहले एवं भोजन कर चुकने के पश्चात मूत्र त्याग अवश्य कर्रें. यह अनावश्यक गर्मी, कब्ज और पथरी से बचा सकता है.
12. कभी भी एक बार में पूर्ण रूप से मूत्रत्याग न करें बल्कि रूक रुक कर करें. यह नियम स्त्री पुरुष दोनों के लिए है ऐसा करके प्रजनन अंगों से सम्बंधित शिथिलता से आसानी से बचा जा सकता है. (कीगल एक्सरसाइज)
13. खड़े होकर मूत्र त्याग से रीढ़ की हड्डी के रोग होने की सम्भावना रहती है. इसी प्रकार खड़े होकर पानी पीने से जोड़ों के रोग ऑर्थरिटिस आदि हो जाते हैं.
14. फल, दूध से बनी मिठाई, तैलीय पदार्थ खाने के तुरंत बाद पानी नहीं पीना चाहिए. ठंडा पानी तो कदापि नहीं.
15. अधिक रात्रि तक जागने से प्रतिरोधक क्षमता कम होने लगती है .
16. जब भी कुल्ला करें आँखों को अवश्य धोएं. अन्यथा मुह में पानी भरने पर बाहर निकलने वाली गर्मी आँखों को नुकसान पहुचायेगी.
17. सिगरेट तम्बाकू आदि नशीले पदार्थों का सेवन करने से प्रत्येक बार मस्तिष्क की हजारों कोशिकाएं नष्ट हो जाती है इनका पुनर्निर्माण कभी नहीं होता.
18. मल मूत्र शुक्र खांसी छींक अपानवायु जम्हाई वमन क्षुधा तृषा आंसू आदि कुल 13 अधारणीय वेग बताये गए हं इनको कभी भी न रोकें. इनको रोंकना गंभीर रोगों के कारण बन सकते हैं .
19. प्रतिदिन उषापान करने कई बीमारियाँ नहीं हो पाती और डॉक्टर को दिया जाने वाला बहुत सा धन बच जाता है.उषापान दिनचर्या का अभिन्न अंग बनायें.
20. रात्रि शयन से पूर्व परमात्मा को धन्यवाद अवश्य दें. चाहे आपका दिन कैसा भी बीता हो. दिन भर जो भी कार्य किये हों उनकी समीक्षा करते हुए अगले दिन की कार्य योजना बनायें अब गहरी एवं लम्बी सहज श्वास लेकर शरीर को एवं मन को शिथिल करने का प्रयास करे. अपने सब तनाव, चिन्ता, विचार आदि परमपिता परमात्मा को सौंपकर निश्चिंत भाव से निद्रा की शरण में जाएँ.

स्नान क्यों और कैसे करे तथा उसके लाभ

💢मालिश के आधे घंटे बाद शरीर को रगड़-रगड़ कर स्नान करें।
💢स्नान करते समय पहले सिर पर पानी डालें फिर पूरे शरीर पर, ताकि सिर आदि शरीर के ऊपरी भागों की गर्मी पैरों से निकल जाय।
💢'गले से नीचे के शारीरिक भाग पर गर्म (गुनगुने) पानी से स्नान करने से शक्ति बढ़ती है, किंतु सिर पर गर्म पानी डालकर स्नान करने से बालों तथा नेत्रशक्ति को हानि पहुँचती है।'
(बृहद वाग्भट, सूत्रस्थानः अ.3)

💢स्नान करते समय मुँह में पानी भरकर आँखों को पानी से भरे पात्र में डुबायें एवं उसी में थोड़ी देर पलके झपकायें या पटपटायें अथवा आँखों पर पानी के छींटे मारें। इससे नेत्रज्योति बढ़ती है।
💢प्रतिदिन स्नान करने से पूर्व दोनों पैरों के अँगूठों में सरसों का शुद्ध तेल लगाने से वृद्धावस्था तक नेत्रों की ज्योति कमजोर नहीं होती।
🌀स्नान के प्रकारः
➖➖➖➖➖
💢मन:शुद्धि के लिए-
1 स्नान सूर्योदय से पहले ही करना चाहिए।ब्रह्म स्नानः
2 ऋषि स्नानः आकाश में तारे दिखते हों तब ब्राह्ममुहूर्त में।
3.दानव स्नानः सूर्योदय के बाद चाय-नाश्ता लेकर 8-9 बजे।
💢A. रात्रि में या संध्या के समय स्नान न करें। ग्रहण के समय रात्रि में भी स्नान कर सकते हैं। स्नान के पश्चात तेल आदि की मालिश न करें। भीगे कपड़े न पहनें।
(महाभारत, अनुशासन पर्व)
💢B. दौड़कर आने पर, पसीना निकलने पर तथा भोजन के तुरंत पहले तथा बाद में स्नान नहीं करना चाहिए। भोजन के तीन घंटे बाद स्नान कर सकते हैं।
बुखार में एवं अतिसार (बार-बार दस्त लगने की बीमारी) में स्नान नहीं करना चाहिए।
💢C दूसरे के वस्त्र, तौलिये, साबुन और कंघी का उपयोग नहीं करना चाहिए।
💢त्वचा की स्वच्छता के लिए साबुन की जगह उबटन का प्रयोग करें।
💢सबसे सरल व सस्ता उबटनः आधी कटोरी बेसन, एक चम्मच तेल, आधा चम्मच पिसी हल्दी, एक चम्मच दूध और आधा चम्मच गुलाबजल लेकर इन सभी को मिश्रित कर लें। इसमें आवश्यक मात्रा में पानी मिलाकर गाढ़ा लेप बना लें। शरीर को गीला करके साबुन की जगह इस लेप को सारे शरीर पर मलें और स्नान कर लें। शीतकाल में सरसों का तेल और अन्य ऋतुओं में नारियल, मूँगफली या जैतून का तेल उबटन में डालें।
💢D मुलतानी मिट्टी लगाकर स्नान करना भी लाभदायक है।
सप्तधान्य उबटनः सात प्रकार के धान्य (गेहूँ, जौ, चावल, चना, मूँग, उड़द और तिल) समान मात्रा में लेकर पीस लें। सुबह स्नान के समय थोड़ा-सा पानी में घोल लें। शरीर पर थोड़ा पानी डालकर घोल को पहले ललाट पर लगायें, फिर थोड़ा सिर पर, कंठ पर, छाती पर, नाभि पर, दोनों भुजाओं पर, जाँघों पर तथा पैरों पर लगाकर स्नान करें।
💢E. स्नान करते समय कान में पानी न घुसे इसका ध्यान रखना चाहिए।
💢F स्नान के बाद मोटे तौलिये से पूरे शरीर को खूब रगड़-रगड़ कर पोंछना चाहिए तथा साफ, सूती, धुले हुए वस्त्र पहनने चाहिए। टेरीकॉट, पॉलिएस्टर आदि..

7 महत्त्वपूर्ण शुक्र नीतियां

जानिए शुक्राचार्य की ऐसी ही 7 खास नीतियों के बारे में-

1. कल की सोचें, लेकिन कल पर न टाले
नीति- दीर्घदर्शी सदा च स्यात्, चिरकारी भवेन्न हि।
अर्थात- मनुष्य को अपना हर काम आज के साथ ही कल को भी ध्यान में रखकर करना चाहिए, लेकिन आज का काम कल पर टालना नहीं चाहिए। हर काम को वर्तमान के साथ-साथ भविष्य की दृष्टी से भी सोचकर करें, लेकिन किसी भी काम को आलय के कारण कल पर न टालें। दूरदर्शी बने लेकिन दीर्घसूत्री (आलसी, काम टालने वाला) नहीं।
2. बिना सोचे-समझे किसी को मित्र न बनाएं
नीति-
यो हि मित्रमविज्ञाय याथातथ्येन मन्दधीः।
मित्रार्थो योजयत्येनं तस्य सोर्थोवसीदति।।
अर्थात-
मनुष्य को किसी को भी मित्र बनाने से पहले कुछ बातों पर ध्यान देना बहुत ही जरूरी होता है। बिना सोचे-समझे या विचार किए किसी से भी मित्रता करना आपके लिए नुकसानदायक हो सकता हैं। मित्र के गुण-अवगुण, उसकी आदतें सभी हम पर भी बराबर प्रभाव डालती हैं। इसलिए, बुरे विचारों वाले या गलत आदतों वाले लोगों से मित्रता करने से बचें।
3. किसी पर भी हद से ज्यादा विश्वास न करें
नीति- नात्यन्तं विश्र्वसेत् कच्चिद् विश्र्वस्तमपि सर्वदा।
अर्थात-आर्चाय शुक्रचार्य के अनुसार, चाहे किसी पर हमें कितना ही विश्वास हो, लेकिन उस भरोसे की कोई सीमा होनी चाहिए। किसी भी मनुष्य पर आंखें बंद करके या हद से ज्यादा विश्वास करना आपके लिए घातक साबित हो सकता है। कई लोग आपके विश्वास का गलत फायदा उठाकर नुकसान भी पहुंचा सकते हैं। इसलिए, इस बात का ध्यान रखें कि अपने विश्वसनियों पर विश्वास जरूर करें लेकिन साथ में अपनी भी आंखें खुली रखें।
4. न करें अन्न का अपमान
नीति- अन्नं न निन्घात्।।
अर्थात- अन्न को देवता के समान माना जाता है। अन्न हर मनुष्य के जीवन का आधार होता है, इसलिए धर्म ग्रंथों में अन्न का अपमान न करने की बात कही गई है। कई लोग अपना मनपसंद खाना न बनने पर अन्न का अपमान कर देते हैं, यह बहुत ही गलत माना जाता है। जिसके दुष्परिणाम स्वरूप कई तरह के दुखों का सामना भी करना पड़ सकता है। इसलिए ध्यान रहे कि किसी भी परिस्थिति में अन्न का अपमान न करें।
5. धर्म ही मनुष्य को सम्मान दिलाता है
नीति- धर्मनीतिपरो राजा चिरं कीर्ति स चाश्नुते।
अर्थात- हर किसी को अपने जीवन में धर्म और धर्म ग्रंथों का सम्मान करना चाहिए। जो मनुष्य अपनी दिनचर्या का थोड़ा सा समय देव-पूजा और धर्म-दान के कामों को देता है, उसे जीवन में सभी कामों में सफलता मिलती है। धर्म का सम्मान करने वाले मनुष्य को समाज और परिवार में बहुत सम्मान मिलता है। इसलिए भूलकर भी धर्म का अपमान न करें, न ही ऐसा पाप-कर्म करने वाले मनुष्यों की संगति करें।
6. पापी-कर्म करने वाले चाहें कितना ही प्रिय हो, उसका त्याग कर देना चाहिए
नीति- त्यजेद् दुर्जनसंगतम्।
अर्थात- कई बार हमारे प्रियजन नास्तिक या पाप-कर्म करने वाले होते हैं। हमे सही-गलत का ज्ञान होने पर भी अपने मोह या लगाव की वजह से हम उस व्यक्ति का त्याग नहीं करते। धर्म- ग्रंथों में इस बात को बिल्कुल ही गलत कहा गया है। पाप-कर्म या गलत काम करने वाला मनुष्य हमें चाहे कितना ही प्रिय क्यों न हो, उसका त्याग कर देना चाहिए।
7. न सभी पर विश्वास करें, न सभी पर शंका
नीति- नैकः सुखी न सर्वत्र विस्त्रब्धो न च शकितः।
अर्थात-सामान्य रूप से दो तरह के लोग पाए जाते हैं- एक वे जो हर किसी पर बड़ी ही आसानी से विश्वास कर लेते हैं और दूसरे वे जो हर किसी पर शक करते हैं। मनुष्य की ये दोनों ही आदतें सही नहीं होती। हर किसी को विश्वास और शक के बीच का संतुलन बना कर चलना चाहिए। मनुष्य को परिस्थिति के अनुसार किसी पर भी शक या विश्वास करना चाहिए।

महाभारत- हर किसी को करना चाहिए इन 5 का सम्मान

इस बात को महाभारत में दिए गए श्लोक से अच्छी तरह समझा जा सकता है-
श्लोक
शुश्रूषते यः पितरं न चासूयेत् कदाचन,
मातरं भ्रातरं वापि गुरुमाचार्यमेव च।
तस्य राजन् फलं विद्धि स्वर्लोके स्थानमर्चितम्,
न च पश्येत नरकं गुरुशुश्रूषयात्मवान्।।
अर्थात- जो मनुष्य पिता, माता, बड़े भाई, गुरु और आचार्य की सेवा करता है। कभी उनके गुणों को दोष की दृष्टि से नहीं देखता, उसे निश्चित ही स्वर्ग की प्राप्ति होती है। ऐसे पुरुष को कभी भी नरक के दर्शन नहीं करना पड़ते।
1. माता-पिता
जो मनुष्य हमेशा अपने माता-पिता का सम्मान करता है, उनकी आज्ञा का पालन करता है वह जीवन में निश्चित ही हर सफलता पाता है, जैसे भगवान राम। भगवान राम अपने पिता के वचन की रक्षा करने के लिए 14 साल के लिए वनवास चले गए। उसी तरह मनुष्य को अपने माता-पिता की हर इच्छा का सम्मान करना चाहिए। इससे निश्चित ही उसे स्वर्ग की प्राप्ति होती है।
2. बड़ा भाई
बड़ा भाई भी पिता जैसा ही माना जाता है। जिस प्रकार पांडवों ने अपने बड़े भाई युधिष्ठिर की हर आज्ञा का पालन किया। कभी उनकी इच्छा के विरुद्ध नहीं गए। उसी तरह मनुष्य को भी अपने बड़े भाई को पिता के समान ही मान कर उसका सम्मान करना चाहिए। बड़े भाई का आदर-सम्मान करने से मनुष्य को जीवन में हर काम में सफलता जरूर मिलती है।
3. गुरु
जिस व्यक्ति से मनुष्य जीवन में कभी भी कोई ज्ञान की बात या कला सीखने को मिल जाए, वह उस मनुष्य के लिए गुरु कहलाता है। एकलव्य ने द्रोणाचार्य को दूर से देखकर ही उनसे धनुष विद्या सीख ली और द्रोणाचार्य को गुरु की तरह सम्मान दिया। द्रोणाचार्य के गुरु दक्षिणा में अंगूठा मांगने पर भी उनमें दोष नहीं देखा और द्रोणाचार्य की मांगी हुई दक्षिणा उन्हें दे दी। उसी प्रकार हमें भी जिससे कुछ भी सीखने को मिल जाए, उसे गुरु की तरह सम्मान करना चाहिए।
4. आचार्य
जो मनुष्य को विद्या देता है, वह आचार्य कहलाता है। जो मनुष्य हमेशा अपने आचार्य की आज्ञा का पालन करता है। कभी उसकी दी हुई विद्या पर शंका नहीं करता और उनकी दी गई विद्या को अपनाता है। वह मनुष्य जीवन में आने वाली हर कठिनाई को आसानी से पार कर जाता है। आचार्य का सम्मान करने वाले को धरती पर ही स्वर्ग के समान सुख मिलता है। इसलिए मनुष्य को हमेशा अपने आचार्य का सम्मान करना ही चाहिए।

सोमवार को है मौनी अमावस्या, बिना भूले करें ये शुभ काम

संगम नगरी इलाहाबाद और चित्रकूट समेत समूचे उत्तर प्रदेश में सोमवार को मौनी अमावस्या के अवसर पर करोडों श्रद्धालु पवित्र नदियों और सरोवरों में आस्था की डुबकी लगाएंगे। सोमवार के दिन मौनी अमावस्या होने से सोमवती अमावस्या भी साथ मनाई जाएगी। दो महत्वपूर्ण पर्वों के एक साथ पडने से घाटों पर श्रद्धालुओं की तादाद में खासी बढोत्तरी के आसार है। प्रयाग में माघ महीने की महिमा का वर्णन करते हुए गोस्वामी तुलसीदास ने रामचरित मानस में लिखा है,
माघ मकर गति रवि जब होई, तीरथ पतिहिं आउ सब कोई। देव दनुज किन्नर नर श्रेणी, सादर मज्जहि सकल त्रिवेणी।।
माघ महीने में प्रयाग में देव, दनुज, किन्नर, गरीब, अमीर, धनी, निर्धन सभी मनुष्य आते हैं । यहां गंगा यमुना एवं अदृश्य सरस्वती के पवित्र संगम का दर्शन कर मुक्ति प्राप्त करने की कामना करते हैं इसलिए कहा भी गया है - \'गंगे, तव दर्शनात्मुक्ति:।\'
कामदगिरी मुख्य द्वार के महंत रामस्वरुप दास महाराज ने बताया कि सोमवती अमावस्या के दिन मौन रहकर मंदाकिनी में स्नान करने और कामदगिरि की परिक्रमा लगाने से मनोवांछित फल की प्राप्ति होती है। पौराणिक मान्यता के अनुसार मौनी अमावस्या सोमवार को पढऩे से इसका महत्व और भी अधिक बढ़ जाता है इस दिन मंदाकिनी नदी में स्नान करने से और कामदगिरि की परिक्रमा लगाने से घर में सुख शांति और वैभव की प्राप्ति होती है। इसी मान्यता के चलते सोमवती अमावस्या के दिन कई प्रदेशों से लाखों श्रद्धालु चित्रकूट में एकत्रित होते हैं और पूजा अर्चना करते हैं।
मकर संक्रांति के अवसर पर 14 जनवरी को शुरू हुए माघ मेले का सोमवार को तीसरा सबसे अधिक महत्वपूर्ण स्नान पर्व मौनी अमावस्या है। इस दिन सभी भक्तजन तीनों नदियों के संगम स्थल पर स्नान कर पुण्य कमाते हैं। इस दिन सोमवती अमावस्या होने के कारण पितरों का तर्पण करना भी अत्यन्त शुभ रहेगा। ऐसा करने से घर के सभी संकट दूर होकर समस्त मनोकामनाओं की पूर्ति होती है।

किसी भी कार्य को शुरू करते समय ध्यान रखें ये बातें, हमेशा होंगे सफल

किसी अच्छे समय का चयन करके किया गया कार्य ही मुहूर्त कहलाता है। यदि किसी काम की शुरुआत में शुभ मुहूर्त देख लिया जाए तो काम के सफल होने की संभावना बढ़ जाती है। मुहूर्त पंचांग के पांच अंगों के बिना अधूरा-सा है। पंचांग मतलब पंच अंग जैसे तिथि, वार, योग, नक्षत्र, करण, इन्हीं से मिलकर शुभ योग का निर्माण होता है, जिसे हम मुहूर्त कहते हैं। इनका एक साथ होना योग कहलाता है।
चंद्रमा मुहूर्त विचार
शुभ कार्य का प्रारंभ करने से पहले (चंद्रमा) का विचार करना चाहिए। जातक को अपनी राशि ज्ञात होनी चाहिए। याद रहे, गोचर का चंद्र्रमा जातक की जन्मराशि से चौथा, आठवा, बारहवां (4, 8, 12) नहीं होना चाहिए। यदि ऐसा होता है तो अशुभ माना जाता है। इस दौरान शुभ कार्य भी त्यागने योग्य है।
रवि पुष्य योग: रविवार को पुष्य नक्षत्र का संयोग रवि पुष्य योग का निर्माण करता है जो कि अच्छा योग माना जाता है।
गुरु पुष्य योग: गुरुवार को पुष्य नक्षत्र गुरु पुष्य योग का निर्माण करता है जो व्यापारिक दृष्टिकोण से शुभ रहता है।
चौघडिय़ा मुहूर्त
ये सभी योग किसी विशेष संयोग के कारण बनते हैं। किसी कार्य का शुभारम्भ करना आवश्यक है लेकिन शुभ योग नहीं बन रहा है, उस स्थिति में चौघडिय़ा काम में लेते हैं, जो कि 1:30 घंटे का होता है और इस दौरान राहुकाल का त्याग करना चाहिए। लाभ, अमृत, शुभ, चंचल ये चौघडिय़ा शुभ माने जाते हैं।
अभिजीत मुहूर्त
अभिजीत मुहूर्त में प्रारंभ किया काम अधिक शुभ और सफल होता है। विद्वानों के अनुसार स्थानिक समय के अनुसार दोपहर के 11 बजकर 45 मिनट से 12 घंटे बजकर 15 मिनट के मध्य यह मुहूर्त होता है। इस मुहूर्त में किया गया कार्य त्वरित सफल होता है।
कुछ अशुभ योगों को टालकर चलें
नक्षत्र, तिथि, वार आदि के संयोग से भी कुछ अशुभ योगों का निर्माण होता है, ऐसे में यदि हम शुभ कार्य की शुरुआत ना ही करें तो ज्यादा उत्तम रहता है। तिथि, नक्षत्र और वार इन तीनों के संयोग से बना योग त्रितयज योग कहलाता है जो कि अशुभ योग है।

यदि पंचमी तिथि को हस्त नक्षत्र और रविवार है तो अशुभ है, सप्तमी तिथि को अश्विनी नक्षत्र व मंगलवार हो तो अशुभ है। षष्ठी को मृगशिरा व सोमवार अशुभ है। अष्टमी को अनुराधा नक्षत्र व बुधवार तथा दशमी को रेवती नक्षत्र व शुक्रवार अशुभ है। नवमी को गुरुवार और पुष्य नक्षत्र व एकादशी तिथि को रोहिणी नक्षत्र शनिवार हो तो शुभ कार्य नहीं करना चाहिए।