Tuesday, March 1, 2016

14 साल बाद जिन्दा लौट आया युवक

सत्य घटना – सांप ने काटा, डाकटरों ने मृत घोषित किया, घरवालों ने गंगा में बहाया, 14 साल बाद जिन्दा लौट आया युवक 



कभी-कभी कुछ ऐसी घटनाये घट जाती है  जिन पर यकीन करना मुश्किल होता है।  ऐसी ही एक घटना हाल ही में बरेली के देबरनिया थाना क्षेत्र के भुड़वा नगला गांव में घटी जब उस गाँव का मृत लड़का 14  साल बाद जिन्दा घर लौट आया। लड़के का नाम  छत्रपाल व उसके पिता का नाम नन्थू लाल है। नन्थू लाल के घर बेटे को देखने वालों की भीड़ जमा हो रही है। लड़के के परिजन और गाँव वाले उसको पहचान चुके है। हर जगह छत्रपाल चर्चा का विषय बना हुआ है। लोग इस चमत्कार को नमस्कार करने पर मजबूर हैं। आइये अब हम आपको छत्रपाल के मरने से लेकर वापस लौटने कि घटना को विस्तारपूर्वक बताते है।
Snake Story
छत्रपाल
घटना  कुछ इस प्रकार है कि  आज से 14 साल पहले  छत्रपाल अपने पिता नन्थू लाल के साथ खेत में काम कर रहा था जहा पर उसे एक ज़हरीले सांप ने डस लिया।  सांप का ज़हर तेजी से उसके शारीर में फैलने लगा।  उसे तुरंत नज़दीकी अस्पताल ले जाया गया पर तब तक देर हो चुकी थी, डॉक्टर ने उसे मृत घोषित कर दिया। परिजन उसके शव को लेकर वापस घर आ गए और उसके अंतिम  संस्कार कि क्रिया शुरू कर दी। हिंदू मान्यता के मुताबिक, पवित्र व्यक्ति, बच्चे, गर्भवती, कुष्ठ रोग और सांप के काटे जाने वाले व्यक्ति का दाह संस्कार नहीं किया जाता है। इन सभी को नदी में बहा दिया जाता है। अतः लड़के के परिजनो ने उसका अंतिम संस्कार करते हुए उसके शव को गंगा में बहा दिया। बहता हुआ छत्रपाल हरि सिंह सपेरे को मिला, जिसने उसका जहर उतार कर उसे फिर से जिन्दा कर दिया। छत्रपाल के साथ हरी सिंह भी उसके गाँव आया हुआ है।
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छत्रपाल व हरी सिंह
सपेरे हरी सिंह ने बताया की उसने यह विद्या अपने गुरु से सीखी थी, क्योंकि वह भी मर कर ही जिन्दा हुआ था। उनके भी शव का अंतिम संस्कार कर गंगा में बहा दिया गया था। बहते हुए वह बंगाल पहुंच गए, जहां पर एक गुरु ने उनको जिन्दा किया। हरी सिंह कहते हैं की एक परंपरा है कि यदि हम किसी को जिन्दा करते हैं तो चौदह साल तक उसे हमारे पास शिष्य बन कर रहना पड़ता है। सिर्फ छत्रपाल ही नहीं बल्कि कई ऐसे शिष्य हैं जो मरकर जिन्दा हुए हैं और उनके साथ घूम रहे हैं।
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हरी सिंह
उन्होंने कहा कि वह सर्पदंश से मरे हुए लोगों की निशुल्क मदद करते हैं और इसके लिए वह जगह-जगह घूमते रहते हैं। साथ ही लाइलाज बीमारियों का भी फ्री में इलाज करते हैं। सांप के काटने से मर चुके दर्जनों लोगों को इन्होने जीवन दान देकर उनके परिजनों को बगैर कीमत वसूले सौंपे हैं। मौत के बाद छत्रपाल को जीवन दान देकर सपेरा हरी सिंह अपने कबीले की परंपरा को बताते हुए कहते हैं कि जिन्दा किया हुआ इंसान कम से कम चौदह वर्ष तक हमारे साथ रहता है। उसके बाद वह अपनी या परिजनों की मर्जी से अपने घर जा सकता है नहीं तो वह जीवन भर हमारे साथ रहे और हमारी तरह बीन बजाय और गुरु शिक्षा ग्रहण करते हुए साधू रूपी जीवन जिए।
सपेरे हरी सिंह दावा करते हैं कि सांप का काटा हुआ इंसान मर जाए और उसके नाक, कान औऱ मुंह से खून नहीं निकला हो तो वह एक महीने दस दिन बाद भी उसे जिन्दा कर लेते हैं। इसी तरह जिन्दा किए हुए कई लोग आज अपने परिवार के साथ जिंदगिया जी रहे हैं। सांप के काटे का इलाज सबसे आसान है। इस इलाज में इस्तेमाल में लाने वाला मुख्य यंत्र साइकिल में हवा डालने वाला पम्प होता है। इसी पम्प और कुछ जड़ी बूटियों से वह मरे हुए लोगों को फिर से जीवन दान देते हैं। बहरहाल जो भी हो यहां सब कुछ फ़िल्मी अंदाज में हुआ। मरे हुए इंसान का दोबारा जिन्दा होकर आना अपने आप में चमत्कार है।


भागवत पुराण- इसलिए होता है महिलाओं को मासिक धर्म

क्या आप जानते हैं कि महिलाओं को होने वाले मासिक धर्म का पुराणों में उल्लेख शामिल है? उन्हें मासिक धर्म क्यों होता है इस पर एक पौराणिक कथा भी मौजूद है जो इन्द्र देव से सम्बन्धित है। भागवत पुराण में वर्णित एक कथा के अनुसार एक बार ‘बृहस्पति’ जो देवताओं के गुरु थे, वे इन्द्र देव से काफी नाराज़ हो गए। इस के चलते असुरों ने देवलोक पर आक्रमण कर दिया और इन्द्र को अपनी गद्दी छोड़ कर भागना पड़ा।
Pauranik katha about Menstruation
असुरों से खुद को बचाते हुए वे सृष्टि के रचनाकार भगवान ब्रह्मा के पास पहुंचे और उनसे मदद मांगने लगे। तब ब्रह्मा जी ने उन्हें बताया कि उन्हें एक ब्रह्म-ज्ञानी की सेवा करनी चाहिए, यदि वह प्रसन्न हो जाए तभी उन्हें उनकी गद्दी वापस प्राप्त होगी। आज्ञानुसार इन्द्र देव एक ब्रह्म-ज्ञानी की सेवा में लग गए। लेकिन वे इस बात से अनजान थे कि उस ज्ञानी की माता एक असुर थी इसलिए उसके मन में असुरों के लिए एक विशेष स्थान था।
इन्द्र देव द्वारा अर्पित की गई सारी हवन की सामग्री जो देवताओं को चढ़ाई जाती है, वह ज्ञानी उसे असुरों को चढ़ा रहा था। इससे उनकी सारी सेवा भंग हो रही थी। जब इन्द्र देव को सब पता लगा तो वे बेहद क्रोधित हो गए और उन्होंने उस ब्रह्म-ज्ञानी की हत्या कर डाली।
एक गुरु की हत्या करना घोर पाप था, जिस कारण उन पर ब्रह्म-हत्या का पाप आ गाया। ये पाप एक भयानक राक्षस के रूप में इन्द्र का पीछा करने लगा। किसी तरह इन्द्र ने खुद को एक फूल के अंदर छुपाया और एक लाख साल तक भगवान विष्णु की तपस्या की।
तपस्या से प्रसन्न होकर भगवान विष्णु ने इन्द्र देव को बचा तो लिया लेकिन उनके ऊपर लगे पाप की मुक्ति के लिए एक सुझाव दिया। इसके लिए इन्द्र को पेड़, जल, भूमि और स्त्री को अपने पाप का थोड़ा-थोड़ा अंश देना था। इन्द्र के आग्रह पर सब राज़ी तो हो गए लेकिन उन्होंने बदले में इन्द्र देव से उन्हें एक वरदान देने को कहा।
सबसे पहले पेड़ ने उस पाप का एक-चौथाई हिस्सा ले लिया जिसके बदले में इन्द्र ने उसे एक वरदान दिया। वरदान के अनुसार पेड़ चाहे तो स्वयं ही अपने आप को जीवित कर सकता है।
इसके बाद जल को पाप का हिस्सा देने पर इन्द्र देव ने उसे अन्य वस्तुओं को पवित्र करने की शक्ति प्रदान की।
यही कारण है कि हिन्दू धर्म में आज भी जल को पवित्र मानते हुए पूजा-पाठ में इस्तेमाल किया जाता है।
तीसरा पाप इन्द्र देव ने भूमि को दिया इसके वरदान स्वरूप उन्होंने भूमि से कहा कि उस पर आई कोई भी चोट हमेशा भर जाएगी।
अब आखिरी बारी स्त्री की थी। इस कथा के अनुसार स्त्री को पाप का हिस्सा देने के फलस्वरूप उन्हें हर महीने मासिक धर्म होता है। लेकिन उन्हें वरदान देने के लिए इन्द्र ने कहा की “महिलाएं, पुरुषों से कई गुना ज्यादा काम का आनंद उठाएंगी”।
इस दौरान वे ब्रह्म-हत्या यानी कि अपने गुरु की हत्या का पाप ढो रही होती हैं, इसलिए उन्हें अपने गुरु तथा भगवान से दूर रहने को कहा जाता है। यही कारण है कि प्राचीन समय से ही मासिक धर्म के दौरान महिलाओं को मंदिर जाने की मनाही थी।

घर से निकलने के पहले जरूर रखना चाहिए इन बातों का ध्यान

ज्योतिष शास्त्र में शकुन तथा अपशकुन के ऊपर कई ग्रंथ रचे गए हैं। इन ग्रंथों में कई इस प्रकार के प्रयोग बताए गए हैं जिनके उपयोग से आपके सभी काम सहज ही बन जाएंगे। इनमें ऐसी कई छोटी-छोटी बातें बताई गई हैं जिनका ध्यान रखने पर कार्य में सफलता मिलने की संभावनाएं बढ़ जाती हैं।

उदाहरण के लिए प्रत्येक दिन डेढ़ घंटे राहू काल का समय होता है। इस समय के दौरान कोई भी शुभ कार्य नहीं करना चाहिए। अन्यथा उस कार्य में निश्चित रूप से हानि होती है। परन्तु जो काम इस समय से पूर्व ही शुरु हो चुका है उसे बीच में नहीं छोड़ना चाहिए। जानिए किस वार को कब राहूकाल होता है।

सोमवार - प्रातः 7.30 बजे से 9.00 बजे तक 
मंगलवार - दोपहर 3.00 बजे से 4.30 बजे तक
बुधवार - दोपहर 12.00 बजे से दोपहर 1.30 बजे तक
गुरुवार - दोपहर 1.30 बजे से 3.00 बजे तक
शुक्रवार - प्रातः 10.30 बजे से 12.00 बजे तक
शनिवार - प्रातः 9.00 बजे से 10.30 बजे तक
रविवार - सायंकाल 4.30 बजे से 6.00 बजे तक

इसके साथ ही घर से निकलते समय कुछ बातों का ध्यान रखना चाहिए जिससे कि हमारा प्रत्येक कार्य सफल हो। आइए जानते हैं कि यात्रा को सफल बनाने के लिए किस दिन घर से निकलते समय क्या करना चाहिए.

सोमवार को यात्रा पर रवाना होने से पहले दर्पण में अपना मुंह देख लेना चाहिए। इससे जिस भी काम के लिए यात्रा पर निकल रहे हैं, वह कार्य अवश्य पूर्ण होता है। 

मंगलवार को घर से बाहर कदम रखने के पहले कुछ मीठा यथा गुड़ खाकर निकलना चाहिए।

बुधवार को साबुत धनिया खाकर निकलना शुभ रहता है।

गुरुवार को घर से बाहर कदम रखने के पहले थोड़ा सा जीरा मुंह में रख लेना चाहिए, इससे पूरा दिन अच्छा बीतता है

शुक्रवार को मीठा दही खाकर घर से बाहर निकलना अत्यन्त शुभ रहता है। 

शनिवार को घर से निकलने के पहले अदरक के ताजा काटे हुए एक-दो टुकड़े मुंह में रखने से काम मे सफलना मिलने के अवसर बढ़ जाते हैं। 

रविवार को घर से निकलने के पहले घर से पान खाकर निकलना शुभ होता है



एक रोटी का यह उपाय बांध देता है बुरे ग्रहों को, देता है सौभाग्य का वरदान

अगर आपका समय ठीक नहीं चल रहा है तथा रोज नई-नई मुसीबतें सामने आ रही हैं। आप चारों तरफ से दुश्मनों से घिरे हुए हैं और कोई भी रास्ता नजर नहीं आ रहा है तो यह छोटा सा उपाय आपकी किस्मत को हमेशा के लिए बदल सकता है।
सुबह रोटी बनाते समय एक रोटी अलग से बनाएं। इसे 4 बराबर हिस्सों में बांट लें। इसके बाद चारों टुकड़ों पर कुछ मीठा जैसे गुड़ या चीनी रख दें। इनमें पहला टुकड़ा गाय को खिलाते हुए पितृगणों तथा भगवान से अपनी समस्याओं के निवारण की प्रार्थना करें।
दूसरा टुकड़ा कुत्ते को खिला दें तथा मन ही मन प्रार्थना बोले- यमराज के मार्ग का अनुसरण करने वाले जो श्याम और शबल नाम के कुत्ते हैं, मैं उनके लिए यह अन्न का भाग देता हूं। वे इस बलि (भोजन) को ग्रहण करें।
रोटी का तीसरा हिस्सा कौओं को खिला देना चाहिए तथा मन ही मन कहना चाहिए- पश्चिम, वायव्य, दक्षिण और नैऋत्य दिशा में रहने वाले जो पुण्यकर्मा कौए हैं, वे मेरी इस दी हुई बलि को ग्रहण करें।
अंत में रोटी के बचे हुए आखिरी हिस्से को भूत-प्रेतों के नाम से किसी चौराहे के एक-तरफ रख दें तथा घर वापस आ जाएं।
इस पूरी क्रिया को करने से सृष्टि की सभी देवशक्तियों को भोग लगता है जिससे वे प्रसन्न होकर आपकी इच्छाएं पूर्ण करने का आशीर्वाद देती है। अगर आपकी कोई समस्या नहीं भी हो तो भी इस उपाय को नियमित रूप से करने पर आपके घर में कभी भी दुर्भाग्य का प्रवेश नहीं हो पाता है तथा जीवन के सभी सुख-आनंद प्राप्त होते हैं।

अगर सुबह दिखे ये सपने तो समझ लीजिए आज लॉटरी लगेगी

ज्योतिष के मुताबिक हमारी नींद में दिखाई देने वाले सपनों से भी हमें निकट भविष्य में होने वाली घटनाओं का पता चलता है। आइए जानते हैं ऐसे ही 5 शुभ तथा 5 अशुभ सपनों के बारे में जिनके दिखाई देने पर हमें निकट भविष्य में या तो अथाह धन की प्राप्ति होती है अथवा हम राजा से भिखारी बन सकते हैं-

सपने में किसी शिशु को चलते हुए देखना अथवा फल की गुठली देखने से जल्दी ही धन मिलने का संयोग बनता है।


अगर स्वप्न में किसी स्त्री से खुद को मैथुन करते हुए दिखाई दे तो जल्दी ही बहुत बड़ी धनराशि अथवा कॉन्ट्रेक्ट मिलने का संकेत होता है। ज्योतिषयों के अनुसार निकट भविष्य में कोई बड़ी लॉटरी भी लग सकती है। परन्तु यदि सपने में कोई गढ़ा हुआ धन देखे तो जल्दी ही लॉटरी से करोड़पति बनने का संकेत है।

खाई देखना

सुबह के समय खाई देखने से भी जल्दी ही धन की प्राप्ति होती है। इसके अतिरिक्त यदि आसमान में बिजली चमकते हुए दिखाई दे तो इसका अर्थ है कि व्यापार में बहुत बड़ी सफलता मिलने वाली है।

विदाई समारोह

इसी तरह यदि किसी कन्या का विदाई समारोह दिखाई दे अथवा मांस दिखाई दे या खुद को दस्ताने पहने देखें तो जल्दी ही करोड़पति बनने का योग होता है। इसी तरह खेत में गेहूं की फसल पकते हुए दिखाई देना भी जल्दी ही सौभाग्य लाता है।

हरा-भरा जंगल देखना

अगर सपने में किसी को धन उधार दे या दियासलाई जलाते हुए दिखाई दे या गाय को गोबर करते हुए देखें तो जल्दी ही धन की प्राप्ति होती है। इसी तरह हरा-भरा जंगल देखने या फूलों से भरी क्यारी भी शुभ मानी जाती है।

बंद दरवाजा देखना

अगर आपको सपने में किसी दरवाजे को बंद होता देखें या कोई आपको कमरे से बाहर निकाल कर दरवाजा बंद करते दिखाई दें तो समझ जाएं कि जल्दी ही आपका धन जाने वाला है।



छोटा जूता देखना

अगर सपने में खच्चर दिखाई दे तो तुरंत ही सावधान हो जाना चाहिए। ऐसा सपना दिखना धनहानि होने का योग बताता है। जबकि छोटा जूता पहनना या ऐसा सपना देखना कि आपके पैर में जूता नहीं आ रहा है तो किसी स्त्री से झगड़ा होने के बाद आर्थिक नुकसान होने की संभावना रहती है।

खाली बैलगाड़ी

अगर आप खाली बैलगाड़ी या कोई वाहन जाते देखें तो समझ जाए कि जल्दी ही व्यापार में कोई बड़ा नुकसान होने वाला है। परन्तु यदि सपने में लाठी दिखाई दे तो धन के साथ साथ यश भी फैलता है।

चंद्रग्रहण देखना

अगर आपको सपने में चंद्रमा टूटते हुए दिखाई दे या चन्द्रग्रहण दिखे तो समझ लेना चाहिए कि कोई बड़ी आकस्मिक समस्या आने वाली है, यह कोई बीमारी, एक्सीडेंट या किसी निकट विश्वस्त द्वारा धोखा देना भी हो सकता है जिसके चलते धन का नुकसान होगा।

खुद को हथकड़ी पहने देखना

अगर सपने में पतला-दुबला बैल दिखें, या खुद को हथकड़ी पहने हुई दिखाई दे अथवा खुद को किसी के आगे भीख मांगते हुए देखें तो तुरंत ही सावधान हो जाएं। ऐसा सपना दिखने पर उस व्यक्ति को भविष्य में बड़ा भारी संकट आने की संभावना रहती है। यह आर्थिक, शारीरिक या मानसिक भी हो सकता है।

सावधानियां

स्वप्न ज्योतिष के शकुन तथा अपशकुन पर विचार करते समय कुछ अन्य बातें भी ध्यान रखनी चाहिए जैसे कि सपना कब देखा जा रहा है। यदि सपना सुबह 3.30 से 5.00 के बीच आता है तो ऐसा सपना एक सप्ताह के अंदर ही सच हो जाता है परन्तु इससे पहले के सपना आने पर सपने के सच होने का समय एक महीना हो जाता है। परन्तु आधी रात से पहले के सपने कम ही सच होते हैं। वे अधिकतर मन की दबी हुई इच्छाएं या तर्क होते हैं जो गहरी नींद आने पर दिखाई देने लगते हैं।

ऎसी 10 आदतों वाले लड़के रह जाते हैं कुंवारे

ऎसे युवक जो शादी के बंधन में बंध जाने को पूरी तरह तैयार हैं और अपने लिए योग्य लड़की की तलाश में हैं। जैसे ही कि सी लड़की ने मिलने का मौका दिया, आव देखा ना ताव, कह दिया "आई लव यू"!! इतने पर ही नहीं रूके और शादी कहां होगी, कौन आएगा, हनीमून कहां होगा, बच्चे किस स्कूल में पढ़ेंगे, सब तय कर लिया। 

ऎसे लोगों से लड़कियां जल्दी ही अपना पिंड छुड़ा लेती हैं। ए क-दूसरे को जाने बिना, समझे बिना, जल्दबाजी में इतना कुछ कह जाना जिसकी संभावना अभी है ही नहीं, किसी को भी अखर सकता है।


आपका पार्टनर बेहद रोमांटिक है और वह हर पल आपके साथ गुजारना चाहता है, लेकिन जब भी आप उससे किसी काम में मदद करने को कहतीं हैं, वह कोई ना कोई बहाना बनाकर कन्नी काट लेता है। इतना ही नहीं, वह आपको जीवन के हर काम में सपोर्ट करने से बचता है। ऎसे लोगों को भी वैवाहिक जीवन में प्रवेश करने में दिक्कत आती है। 


किसी भी क्षेत्र का या हर क्षेत्र का थोड़ा-थोड़ा ज्ञान होना अच्छी बात है, लेकिन इसके साथ ही आपको यह भी पता होना च ाहिए कि इस ज्ञान का इस्तेमाल कहां और कैसे करना है। अक्सर अपनी गर्लफ्रेंड की बात को काट कर अपने ज्ञान का बाजा बजाने वाले लोग पसंद नहीं किए जाते हैं। ऎसे लोगों को  किसी भी जगह तवज्जो नहीं मिलती है जो हर बात में कमी निकाले या अपनी समझ का ढोल पीटना शुरू कर दें। ऎसे लोगों को लड़कियां अच्छा लाइफ पार्टनर नहीं मानती हैं

तुम आगे बढ़ो, हम तुम्हारे साथ हैं" का नारा सार्वजनिक जीवन में तो लुभावना हो सकता है, लेकिन निजी जीवन में यह खतरनाक साबित होता है। आपके पार्टनर को उसकी हां में हां मिलाने वाले मिठ्ठू नहीं चाहिए होता है बल्कि उसकी योजना का सही-सही विश्लेषण कर सही राय देने वाले सच्चा साथी चाहिए होता है। अपने पार्टनर के हर कदम पर साथ देने की सोच से हां में हां और ना में ना कहने वाले लोग जीवन साथी के रूप में नहीं चुने जाते। 


हर गलती, सफलता और बात में अपने आप की ही महिमा का बखान करने वाले और खुद को सर्वश्रेष्ठ समझने वाले युवक की शादी का कार्ड छपना थोड़ा मुश्किल ही होता है। साथ ही में ऎसे लोग अपनी गलती को स्वीकार करने से भी कतराते हैं। लड़कियों का मानना है कि ऎसे लोग जो अपनी गलती स्वीकार करने से डरते हैं और अपनी बात को सही साबित करने में  किसी भी तरह का झूठ बोलने से नहीं हिचकते, वे अच्छे जीवन साथी साबित नहीं हो सकते हैं।


काम की तलाश करना, नौकरी छोड़ देना या फिर नौकरी से निकाल दिए जाना तो कोई अजीब बात नहीं, लेकिन ये कार्यकम हमेशा ही चलता रहे, तो बात चिंताजनक है। इससे यह साबित होता है कि वह युवा काम करना ही नहीं चाहता। उसे अपने कॅरियर को आगे बढ़ाने की जरा भी चिंता नहीं है। ऎसे लड़कों के साथ कैसे कोई लड़की पूरा जीवन बिताने की सोच सकती है। लगातार बेरोजगारी भी संबंधों में अस्थिरता लाती है।

अपनी बात को ज्यादा जोरदार ढंग से रखने के लिए ओवरए क्टिंग का सहारा लेना बुरी बात नहीं, लेकिन ये तरीका हर जगह और हर मौके पर सही नहीं होता है। इससे लोग आपको अलग-थलग कर देते हैं क्योंकि आपका व्यवहार उनके स मझ से परे होता है। लड़कियां भी ऎसे लोगों को अपनी पसंद से बाहर रखती हैं।

ऎसे लोगों को क्या कहा जाए जो अपनी चिंता को भी अपने पार्टनर की झोली में डाल देते हैं। बजाय अपनी पार्टनर की समस्याओं को सुनने, समझने और हल करने के, वे अपना ही राग अलापते रहते हैं। रिलेशनशिप में एक-दूसरे पर निर्भर होना बुरी बात नहीं है, लेकिन पूरी तरह से किसी पर बोझ बन जाना गलत है। ये आपके व्यवहार से आसानी से मालूम चल जाता है। ऎसे लड़कों को लड़कियां सिरे से ही नकार देती हैं।

जिन लोगों का मानना है कि वादा हमेशा टूट जाने के लिए ही होता है, उनका मालिक तो भगवान भी नहीं होता है, तो फिर लड़कियां कैसे करेंगी। विश्वास दिलाना और करना दोनों संबं धों को मजबूत बनाते हैं, लेकिन अगर आप वादा तोड़ देते हैं और ऎसा लगातार करते हैं। ऎसे में आपको कोई लाइफ पार्टनर के रूप में चुन ले, इसकी संभावना बेहद कम है।

किसी जोक पर या कॉमेडी सीन पर मुंह फाड कर हंसना गंवारा हो सकता है, लोग उसे स्वाभाविक रिऎक्शन ही समझेंगे, लेकिन अपनी गर्लफ्रेंड की गलती या बेवकूफी पर मुंह फाड़ कर हंसना भारी पड़ सकता है। उनको लगता है कि आप उनका सम्मान नहीं करते और आपको कुंवारा ही रहना पड़ेगा।

Monday, February 29, 2016

10 भारतीय परंपराएं जो अनूठी होने के साथ उपयोगी भी हैं

भारत अपने आप में एक अनूठा देश है जहां हर चीज को धर्म और समाज के साथ जोड़ दिया गया है। हालांकि ऊपर से देखने पर इनका कोई विशेष महत्व नहीं दिखाई पड़ता परन्तु सूक्ष्म रूप से ये हमें मानसिक, शारीरिक तथा आध्यात्मिक रूप से प्रभावित करते हैं। इसी कारण से हमारे पूर्वजों ने कुछ ऐसे धार्मिक नियम बनाएं जो सामाजिक रूप से समाज में उपयोगी तो थे ही, साथ में हमारे शरीर पर भी उनका अच्छा असर होता है। आइए जानते हैं ऐसी ही 10 परम्पराओं के बारे में...

पुरुषों के सिर पर चोटी क्यों

यदि आप यह मानते हैं कि सिर्फ भारतीय पुरुष ही चोटी रखते हैं तो सबसे पहले यह जान लें कि अन्य एशियाई देशों यथा चीन, कोरिया तथा जापान में भी पुरुषों के सिर पर चोटी रखने की परंपरा है। इसके पीछे भी एक वैज्ञानिक कारण बताया जाता है। सुश्रुत ऋषि के अनुसार सिर हमारे सिर का सबसे महत्वपूर्ण हिस्सा है। यहां सहस्त्रार चक्र में शरीर की सभी नसें आकर मिलती है जिसे ब्रह्मरंध्र भी माना गया है। इसी ब्रह्मरंध्र को जागृत करने के लिए पुरुषों में शिखा बंधने की परंपरा शुरू हुई। शिखा रखने से मस्तिष्क का यह हिस्सा सक्रिय हो जाता है और हमारी शक्तियों को बढ़ा देता है।


हमें मंदिर जाकर भगवान की परिक्रमा क्यों करनी चाहिए

भारतीय मंदिरों को वास्तु के विशेष नियमों का पालन करते हुए बनाया जाता है। इसमें मंदिर के गर्भगृह (अथवा मूलस्थान) को इस प्रकार से बनाया जाता है कि वहां पर पृथ्वी की अधिकतम चुंबकीय ऊर्जा उत्पन्न हो सके। गर्भगृह में ही मूर्ति स्थापित की जाती है। साथ ही ईश्वर प्रतिमा के चरणों में तांबे से बने यंत्र, घंटियां, कलश आदि वस्तुएं स्थापित की जाती हैं। तांबा एनर्जी का सुचालक होने के कारण पृथ्वी की सकारात्मक ऊर्जा को प्रतिमा की तरफ आकर्षित करता है। इससे प्रतिमा के चारों तरफ आभामंडल बन जाता है। जब हम प्रतिमा के चारों तरफ परिक्रमा करते हैं तो यह शक्ति हमारे शरीर के अंदर भी प्रवेश करती है। हालांकि यह प्रक्रिया बहुत ही धीमे और अदृश्य रूप में होती है परन्तु लंबे समय तक किसी मंदिर में जाकर परिक्रमा करने पर इसका लाभ स्पष्ट अनुभव किया जा सकता है।



भारतीय व्रत क्यों करते हैं

आयुर्वेद में बताया गया है कि हमारा शरीर प्रकृति द्वारा बनाई गई स्वसंचालित मशीन है जो 24 घंटे, सातों दिन मृत्यु तक लगातार बिना रूके काम करती रहती है। हमारा पाचन संस्थान भी इसी का एक हिस्सा है। लगातार भोजन करने और उसे पचाने से हमारे पाचन संस्थान पर दबाव पड़ता है जिससे उसमें टॉक्सिक पदार्थ पैदा हो जाते हैं। सप्ताह में एक दिन व्रत करने पर हमारा पेट स्वयं ही इन पदार्थों को बाहर निकाल देता है जिससे शरीर स्वस्थ रहता है। वैज्ञानिकों के अनुसार नियमित रूप से व्रत करने के कई फायदे हैं, शोध के अनुसार व्रत करने से कैंसर, कार्डियोवस्कुलर डिजीडेज, डायबिटीज, पाचन संबंधी बीमारियां दूर रहती हैं।



सुबह के समय सूर्य नमस्कार तथा सूर्य को अर्ध्य चढ़ाना

सूर्य नमस्कार करने के लिए कुछ नियम बताए गए हैं, यथा इसे सुबह ब्रह्म मुहूर्त में ही करना चाहिए। इसके पीछे भी कई वैज्ञानिक कारण हैं। सबसे पहला सुबह का समय ब्रह्ममूहूर्त माना जाता है इस समय मस्तिष्क की सक्रियता सर्वाधिक होती है, अत: इस समय किया गया कार्य अधिक एकाग्रता तथा मनोयोग से होता है जिससे उसमें सफलता की संभावना बढ़ जाती है। सुबह सूर्य को अर्ध्य चढ़ाते समय गिरते हुए जल से सूर्य के दर्शन करना हमारी आंखों के लिए अच्छा रहता है। इससे आंखों की रोशनी बढ़ती है। इसके साथ-साथ सुबह के समय सूर्य नमस्कार करने से पूरे शरीर का योगाभ्यास हो जाता है तथा शरीर को दिन भर के लिए आवश्यक ऊर्जा शक्ति मिल जाती है।


हम चरण स्पर्श क्यों करते हैं

भारतीयों में अपने से बड़ों के चरण छूकर प्रणाम करने की परंपरा है, इसके प्रत्युत्तर में बड़े भी हमारे सिर पर अपना हाथ रखकर आशीर्वाद देते हैं। सबसे पहले तो इस तरह चरण छूने से हम अपने बड़ों के प्रति अपनी भावनाएं तथा आदर दिखाते हैं। इसके साथ ही जब हम अपने हाथों से उनके पैर छूते हैं तथा वो अपना हाथ सिर पर रखकर आशीर्वाद देते हैं तो यह तरह का प्राकृतिक सर्किट बन जाता है जिससे उनकी ऊर्जा का प्रवाह हमारे अंदर होने लगता है। उस समय हमारे हाथ की ऊंगलियां तथा सिर रिसेप्टर का कार्य करने लगती हैं तथा हम उनमें मौजूद जैविक ऊर्जा को ग्रहण करने लगते हैं। यही कारण है कि सभी लोग अपने से बड़े विशेष तौर पर साधु-संतों के चरण छूकर उनका आशीर्वाद लेना चाहते हैं।

हम तुलसी की पूजा क्यों करते हैं

तुलसी के पेड़ का आयुर्वेद में बहुत महत्व बताया गया है। इसकी पत्तियों में पारा होता है जिसके कारण इसमें बैक्टीरिया को मारने की क्षमता है। प्रतिदिन एक तुलसी का पत्ता खाने से शरीर स्वस्थ रहता है तथा छोटी-मोटी बीमारियों का शरीर पर असर नहीं होता। इसके अलावा यह भी माना जाता है कि तुलसी के निकट सांप, मच्छर तथा मक्खियां जैसे हानिकारण जीवन नहीं आते। ऐसे में इसे घर में रखने पर जहां इन जीवों से बचाव होता है वहीं आवश्यकता पडऩे पर तुलसी की पत्तियों का उपयोग भी किया जा सकता है। परन्तु तुलसी की पत्तियों को कभी भी दांतों से नहीं चबाना चाहिए वरन उसे पानी के साथ निगल लेना चाहिए अन्यथा दांतों के खराब होने का खतरा बना रहता है।

हम पीपल की पूजा क्यों करते हैं

यदि उपयोग की दृष्टि पीपल का पेड़ आम व्यक्ति के लिए साधारण हो सकता है परन्तु आयुर्वेद के अनुसार इसका दवाईयों में बहुत प्रयोग होता है। परन्तु पीपल का पेड़ ही एक ऐसा पेड़ है जो रात में भी ऑक्सीजन का निर्माण करता है। पीपल के इसी गुण के चलते हिंदू इसे भगवानस्वरूप मानते हैं तथा इसकी पूजा करते हैं।

महिलाएं हाथों में चूडिय़ां क्यों पहनती हैं

हाथों की कलाई में नसों का जाल होता है जहां हाथ कर आदमी की धड़कन देखी जाती है। यहां पर सही तरह से दबाव देकर शरीर के रक्तचाप को नियमित किया जा सकता है। इसी कारण से औरतों के लिए चूडियां पहनना अनिवार्य किया गया। इससे कलाईयों पर चूडियों का घर्षण होता है और उनकी नसों पर दबाव पड़ता है फलस्वरूप उनका स्वास्थ्य ठीक रहता है।

विवाहित स्त्रियां मांग में सिंदूर क्यों भरती हैं

विवाहित स्त्रियों द्वारा मांग में सिंदूर भरने का कारण उनके वैवाहिक जीवन से जुड़ा हुआ है। सिंदूर को टर्मेरिक लाइम तथा पारे से मिलाकर बनाया जाता है। पारा जहां शरीर के ब्लडप्रेशर को नियमित करता है वहीं औरतों की कामेच्छा को भी उत्तेजित करता है। इससे मस्तिष्क का तनाव भी दूर होता है। इसी कारण से विधवाओं तथा कुंवारी महिलाओं के लिए मांग में सिंदूर लगाना निषेध किया गया है। परन्तु सिंदूर का पूरा फायदा उठाने के लिए ललाट के ठीक बीच में लगाना

हम नाक और कान क्यों छिदवाते हैं

भारतीय महिलाओं में प्रचलित इस परंपरा का संबंध पूरी तरह से शारीरिक स्वास्थ्य से जुड़ा हुआ है। भारतीय चिकित्साशास्त्रियों के अनुसार कान और नाक की कुछ नसों का सीधे दिमाग के सोचने वाले प्रतिक्रिया करने वाले भाग से संबंध होता है। नाक-कान छिदवाने से दिमांग की इन नसों पर दबाव पड़ता है जिससे मस्तिष्क की अतिसक्रियता समाप्त होकर नियंत्रण में आती है।